रांची : मोराबादी मैदान में रचना शिल्पियों ने बहायी काव्य-धारा

रांची : मोराबादी मैदान में आयोजित क्राफ्ट ऑफ इंडिया मेला में झमाझम बारिश के बाद रांची के रचना शिल्पियों ने काव्य-धारा बहायी. कवि सम्मलेन में एक से एक प्रस्तुति से मोराबादी मैदान गुलजार रहा. संयोजक सदानन्द सिंह यादव (कवि एवं लोकगायक) ने विभिन्न विधाओं में पारंगत कवियों की महफिल सजायी, जिसमें डॉ सुरेंदर कौर नीलम […]

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रांची : मोराबादी मैदान में आयोजित क्राफ्ट ऑफ इंडिया मेला में झमाझम बारिश के बाद रांची के रचना शिल्पियों ने काव्य-धारा बहायी. कवि सम्मलेन में एक से एक प्रस्तुति से मोराबादी मैदान गुलजार रहा. संयोजक सदानन्द सिंह यादव (कवि एवं लोकगायक) ने विभिन्न विधाओं में पारंगत कवियों की महफिल सजायी, जिसमें डॉ सुरेंदर कौर नीलम की अध्यक्षता में 20 से अधिक कवियों और शायरों ने उपस्थित श्रोतासमूह को भाव विभोर कर दिया.

मुख्य अतिथि के रूप में माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष चंद प्रसाद, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ शिशिर सोमवंशी एवं सुनील सिंह बादल उपस्थित रहे. कार्यक्रम की शुरुआत डॉ मीरा सोनी की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुई. जैसे-जैसे शाम ढलती गयी सदानंद सिंह यादव के संचालन में कार्यक्रम परवान चढ़ता रहा.

नन्दनी प्रणय ने – ‘हो तुम पहला प्यार प्रिये, जीवन का आधार प्रिये।। तुम सुख-दुख की नैया हो, तुम ही खेवनहार प्रिये…।।’ संध्या चौधरी ने ‘हमें छुपाने की अदा आती है बड़ी शिद्दत से, ये हुनर भी कोई हमसे सीखे बड़े एहतियात से, जमाने की नजरों से बचा कर इस कदर दिल में बसाया.’ मीनू सिन्हा ने ‘ना मैं तिल हूं न मैं जौ हूं, क्यों करते हो मेरा दान, बंद करो यह झूठी रस्में, मत करो पापा कन्यादान’ पेश किये.

डॉ शिशिर सोमवंशी ने ‘तुमने छुआ, छूकर कहा, कैसे हो तुम? अच्छा लगा’, सुरेंदर कौर नीलम ने ‘ये दौर नया है नयी रवानी है, बदला हुआ समय नयी कहानी है’, सीमा चंद्रिका तिवारी ने ‘हमारे दर से आकर के कोई भूखा नहीं जाता, मैं बादल हूं मेरे घर से कोई सूखा नहीं जाता।। हमें तो हंस के आता है मौत को टाल देना, हां मगर घर आनेवालों को कभी रोका नहीं जाता.’ वहीं, सूरज श्रीवास्तव ने ‘तुम्हें मिलने की ख्वाहिश में हमारा दिल तड़पता है, जरा खुशबू की चाहत है गुलाबों का पता दे दो.’ गाया.

डॉ मीरा सोनी ने ‘घर के अधुरेपन को पूरा करती बेटियां, दोनों कुलों को रौशन करती हैं बेटियां. सदानंद सिंह यादव ने ‘हमारी गली में भी आते रहो, हमें भी जगाते सुलाते रहो.’ सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. अनुराधा प्रसाद, रश्मि सिंह, मीना द्विवेदी, विजयलक्ष्मी सिन्हा’ गिरजाशंकर पेरिवाल की शानदार प्रस्तुति ने कार्यक्रम में जान फूंक दी. मौके पर माटी कला बोर्ड के सदस्य नीरज प्रजापति अखिलेश महतो, संगीता यादव सहित नगर की अनेक साहित्यिक विभूतियां उपस्थित रहीं.

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