रांची : एकता के हर प्रयास को समर्थन : लेहमन्न

जीइएल चर्च छाेटानागपुर व असम का शतवर्षीय ऑटोनॉमी जुबली समारोह शुरू रांची : जीइएल चर्च छोटानागपुर व असम का शतवर्षीय ऑटोनॉमी जुबली समारोह गुरुवार को गोस्सनर मध्य विद्यालय के प्रांगण में शुरू हुआ़ गोस्सनर मिशन जर्मनी की क्यूरेटोरिम के अध्यक्ष हेराल्ड लेहमन्न ने कहा कि उपनिवेशवादी ताकतों के खिलाफ और अपनी धार्मिक पहचान बनाये रखने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 1, 2019 9:02 AM
जीइएल चर्च छाेटानागपुर व असम का शतवर्षीय ऑटोनॉमी जुबली समारोह शुरू
रांची : जीइएल चर्च छोटानागपुर व असम का शतवर्षीय ऑटोनॉमी जुबली समारोह गुरुवार को गोस्सनर मध्य विद्यालय के प्रांगण में शुरू हुआ़ गोस्सनर मिशन जर्मनी की क्यूरेटोरिम के अध्यक्ष हेराल्ड लेहमन्न ने कहा कि उपनिवेशवादी ताकतों के खिलाफ और अपनी धार्मिक पहचान बनाये रखने के लिए स्थानीय कलीसिया से जुड़े पुरखों ने सौ साल पहले जो निर्णय लिया, वह अविस्मरणीय है.
इसने कलीसिया को भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार किया. स्थानीय लूथेरन कलीसिया के जीइएल व एनडब्ल्यूजीइएल चर्च में विभाजन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि गोस्सनर मिशन इन दोनों चर्च को कोई निर्देश तो नहीं दे सकता, पर यह जरूर कहना चाहता है कि वह उनकी एकता के लिए हर प्रयास का समर्थन करेगा. जब हृदय में प्रेम की भावना होती है, तब हम दूसरे की बेहतरी चाहते हैं, समझौते में झुकने के लिए भी तैयार रहते है़ं
एक शिक्षित समाज के निर्माण में दे रहे योगदान : जीइएल चर्च के मॉडरेटर बिशप जोहन डांग ने कहा कि लोगों को शिक्षित करना भी एक मिशनरी कार्य है.
यह एक शिक्षित समाज के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है. जीइएल चर्च ने 1852 में ही बेथेसदा स्कूल की स्थापना कर इस दिशा में अपनी शुरुआत की थी. वर्तमान में इस चर्च द्वारा छह किंडर गार्टेन, 73 प्राइमरी, 52 मिडिल, चार हायर सेकेंडरी, 24 हाई स्कूल, तीन कॉलेज, एक प्राइमरी टीचर्स एजुकेशन कॉलेज और एक बीएड कॉलेज संचालित किये जा रहे है़ं
जीवंत और प्रगतिशील कलीसिया: जर्मनी के कांसुलेट जेनरल डॉ माइकल फीनर ने कहा कि शिक्षा के प्रति जीइएल चर्च की प्रतिबद्धता ने उन्हें काफी प्रभावित किया है. इससे समाज को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है़
जो शिक्षित होते हैं, उनकी स्थित बेहतर होती है और वे अपने अधिकारों के बारे में जान पाते हैं. आदिवासी संदर्भ में यह बात महत्वपूर्ण है. जीइएल चर्च एक जीवंत और बढ़ती हुई कलीसिया है. चर्च ऑफ बर्लिन, ब्रांडेनबर्ग की महासचिव, बिशप वूलरिक ट्रॉटवीन ने कहा कि 31 अक्तूबर को मार्टिन लूथर मत संशोधन दिवस के 502 साल भी पूरे हुए हैं, जिसने हमारे विश्वास को एक नयी ज्योति दी. गोस्सनर मिशन के पूर्व निदेशक तोबियस ट्रेसलर ने भी विचार रखे़
जुबली स्मारक भवन का शिलान्यास
इस अवसर पर जुबली स्मारक भवन का शिलान्यास किया गया. साथ ही सेंटेनरी ऑटोनॉमी जुबली स्मारक का अनावरण हुआ. जुबली स्मारिका, गोस्सनर कलीसिया का इतिहास, ऑल्फ्रेड नाेट्रॉट: ए ग्रेट मिशनरी व साक्षीवाणी के चार राग पुस्तकों का विमोचन भी हुआ. कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए. मंच संचालन आश्रय एक्का व एलिस डुंगडुंग ने किया
कार्यक्रम में गोस्सनर मिशन जर्मनी के निदेशक रेव्ह क्रिश्चियन रेयजर, लूथेरन वर्ल्ड फेडरेशन के एशिया सेक्रेटरी रेव्ह डॉ फिलिप लॉक, नेशनल काउंसिल ऑफ चर्जेज इन इंडिया के महासचिव डॉ असिर एब्नेजर, वाइएमसीए के महासचिव चोन्हास कुजूर, जीइएल चर्च के डिप्टी मॉडरेटर बिशप जोसफ सांगा, बिशप जॉनसन लकड़ा, बिशप अमृत जय एक्का, बिशप निरल भुईयां, बिशप मुरेल बिलुंग, पावल लुगुन, पूर्व मॉडरेटर डॉ नेलसन लकड़ा, पूर्व बिशप ख्रिस्त हेमंत हंसदा, महासचिव सुजया कुजूर, आयोजन के संयोजक सिरिल लकड़ा सहित अन्य मौजूद थे़
ऑटोनॉमी की पृष्ठभूमि
दो नवंबर 1845 को स्थापित इस लूथेरन कलीसिया से जुड़े जर्मन मिशनरियाें को प्रथम विश्वयुद्ध के समय तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने वापस भेज दिया और स्थानीय लूथेरन मसीहियों को यह विकल्प दिया कि वे उनके एंग्लिकन चर्च के सदस्य बन जाये अथवा अपने बूते अपनी कलीसिया चलायें.
तब स्थानीय मसीहियों ने अपने लूथेरन पहचान को बरकरार रखने के लिए विलय का प्रस्ताव अस्वीकार किया और 10 जुलाई 1919 को आत्मशासन, आत्मपालन व स्व- सुसमाचार प्रचार का निर्णय लिया. वर्तमान में जीइएल कलीसिया के देश के विभिन्न राज्यों में 1940 चर्च है़ं

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