सुनिए झारखंड के नायकों को : झारखंड में भी जल्द-से-जल्द खेल नीति लागू हो

सपना राज्य के खिलाड़ियों के विकास के लिए किसी भी सरकार ने नहीं सोचा 19 साल पूर्व जब झारखंड अलग राज्य बना था, तब लगा था यहां के खिलाड़ियों का भविष्य बेहतर होगा, उन्हें रोजगार मिलेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अब तक कई सरकारें आयीं, लेकिन राज्य के खिलाड़ियों के विकास के लिए किसी […]

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सपना
राज्य के खिलाड़ियों के विकास के लिए किसी भी सरकार ने नहीं सोचा
19 साल पूर्व जब झारखंड अलग राज्य बना था, तब लगा था यहां के खिलाड़ियों का भविष्य बेहतर होगा, उन्हें रोजगार मिलेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.
अब तक कई सरकारें आयीं, लेकिन राज्य के खिलाड़ियों के विकास के लिए किसी भी सरकार ने नहीं सोचा. वर्ष 2007 में खेल नीति बनी भी, लेकिन कुछ त्रुटियां होने के कारण उसे लागू नहीं की जा सकी. 2014 में इसमें संशोधन किया गया, लेकिन इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका. इसका नतीजा यह हुआ कि राज्य के खिलाड़ियों ने दूसरे राज्य और विभागों की ओर रुख किया.
चुनाव के बाद किसकी सरकार बनेगी, यह बाद की बात है, लेकिन खेल नीति लागू करना नयी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. बगैर खेल नीति लागू किये राज्य में खेल और खिलाड़ियों का विकास नहीं हो सकता और न ही खिलाड़ियों का पलायन रुकेगा. वहीं हरियाणा, छत्तीसगढ़, ओड़िशा जैसे राज्यों में वहां की सरकार खेल और खिलाड़ियों के विकास पर काफी ध्यान देती है.
उसी तरह झारखंड में भी जल्द-से-जल्द खेल नीति लागू हो और राज्य में खिलाड़ियों को नौकरी मिले. सरकार को चाहिए कि वह यहां के खेल और खिलाड़ियों के विकास पर ध्यान दे. ताकि स्थानीय खिलाड़ी प्रोत्साहित हों और उन्हें दूसरे राज्यों या विभागों का मुंह नहीं ताकना पड़े. साथ ही पदक विजेता खिलाड़ियों को यहां सही समय पर कैश अवॉर्ड भी मिले.
वोट की अपील
राज्य का विकास सरकार के साथ-साथ जनता के हाथ में है. अपने राज्य के विकास के लिए सही उम्मीदवार को चुनना जरूरी है. इसके लिए घर से निकल मतदान स्थल तक जाना होगा अौर अपने मताधिकार का प्रयोग करना होगा. चुनाव की नियत तिथि को वोट देने खुद निकलें अौर आस-पड़ोस के वोटरों को भी प्रेरित करें.
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