मांडर :बुढ़ाखुखरा-मंदरो पथ बेहाल कई गांव के लोग हैं प्रभावित

सड़क के नाम पर सिर्फ बचे हैं मेटल मांडर : मांडर प्रखंड में एक जर्जर सड़क से कई गांव के लोग प्रभावित हैं. बुढ़ाखुखरा से कैम्बो भाया कुरकुरा मंदरो होते हुए बेंजारी पतरा तक जानेवाली प्रखंड की इस एकलौती सड़क से बंझिला, पोखरटोली, महुआजाड़ी, दर्जीजाड़ी, बोन्डो, कानीजाड़ी, बांसजाड़ी, सरगांव, मुरजुली, गुड़गुड़जाड़ी, कैम्बो, बखार, कुरकुरा व […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
सड़क के नाम पर सिर्फ बचे हैं मेटल
मांडर : मांडर प्रखंड में एक जर्जर सड़क से कई गांव के लोग प्रभावित हैं. बुढ़ाखुखरा से कैम्बो भाया कुरकुरा मंदरो होते हुए बेंजारी पतरा तक जानेवाली प्रखंड की इस एकलौती सड़क से बंझिला, पोखरटोली, महुआजाड़ी, दर्जीजाड़ी, बोन्डो, कानीजाड़ी, बांसजाड़ी, सरगांव, मुरजुली, गुड़गुड़जाड़ी, कैम्बो, बखार, कुरकुरा व मंदरो गांव सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं.
इन गांवों के लोग प्रतिदिन इस सड़क से आना-जाना करते हैं. करीब 15 किलोमीटर लंबी इस सड़क की मरम्मत 2008 में करायी गयी थी. अब सड़क के नाम पर यहां सिर्फ उखड़े हुए मेटल व गड्ढे ही बचे हुए हैं.
ग्रामीण दोपहिया वाहन व साइकिल से इस सड़क पर किसी तरह आना-जाना तो कर लेते हैं. लेकिन इस सड़क पर चारपहिया वाहनों का परिचालन जोखिम भरा हो गया है. सड़क की जर्जर हालत के कारण सबसे अधिक परेशानी ग्रामीणों को किसी बीमार को अस्पताल अथवा कृषि उत्पादित सामग्री को बाजार तक ले जाने में होती है. पहले तो वाहन चालक इस सड़क से जुड़े गांवों में जाना नहीं चाहते हैं, अगर तैयार भी होते हैं तो अधिक भाड़ा वसूलते हैं.
ग्रामीणों ने कहा, रात में गुजरने पर जान को खतरा
गुड़गुड़जाड़ी गांव के महबूब अंसारी ममता वाहन के चालक हैं. वे कहते हैं कि जब भी किसी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए मांडर स्थित अस्पताल ले जाता हूं, तो इस सड़क की जर्जर हालत से उनकी जान पर बन आती है. वे रास्ते भर जच्चा-बच्चा की सलामती के लिए दुआ करते रहते हैं.
कैम्बो गांव के बबलू साहू कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व अन्य कार्य को लेकर प्रतिदिन मांडर जाना पड़ता है. दिन में बाइक से किसी तरह आना-जाना हो जाता है, लेकिन कभी रात हो जाने पर इस सड़क पर बाइक चलाना खतरे से खाली नहीं है. रात में यहां कई लोग दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं. गुड़गुड़जाड़ी के ही टेंपो चालक जगदीश साहू बताते हैं कि सड़क की जर्जर हालत का असर सीधे तौर पर उनके रोजगार पर हुआ है. टूट-फूट के डर से यहां चलने वाले अधिकांश टेंपो बंद हो गये हैं. जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भी भुगतना पड़ रहा है.
बोले बुजुर्ग
हमारे वोट से ही अच्छे उम्मीदवार निकल कर आते हैं
बरियातू की रहनेवाली मालती सिन्हा 76 वर्ष की है़ लेकिन इस बार भी लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने को लेकर काफी उत्साहित हैं. वह बताती है कि पहली बार वोट मोतिहारी में परिवार संग डालने गयी थी.
उस समय परिवार के हर सदस्य एक साथ बूथ पर जाकर वाेट डाला था. आज तक जब भी वोटिंग का अवसर आया है, हमेशा वोट करने गयी. क्याेंकि वोट से ही अच्छे उम्मीदवार का चयन होगा और देश का विकास होगा. जिससे आनेवाली पीढ़ी को सुविधा मिलेगी. वोट हमेशा सोच और समझ कर डालना चाहिए.
हमारे वोट से ही अच्छे उम्मीदवार निकल कर आते है़ं हालांकि उम्मीदवार जो भी हो देश के विकास के लिए काम करेंगे, तो उन्हें ही वोट करना है़ वोट की प्रक्रिया अब तो काफी आसान हो गयी है़ इसलिए महिला, पुरुष, बुजुर्ग सभी घर से वाेट करने जरूर जाये. अगर कोई बाहर रहता हो, तो भी वोट करने जरूर अपने शहर के बूथ तक जाये. हमारा एक-एक वोट काफी महत्वपूर्ण है़ वोट देने जरूर से जरूर जाये.
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