बिजली बोर्ड में 11 लेखा पदाधिकारियों की नियुक्ति रद्द

एपीडीआरपी योजना गड़बड़ी के आरोपी तीन पदाधिकारियों पर अभियोजन की स्वीकृति26 सौ कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला लंबित, वित्त से सहमति ली जायेगीवरीय संवाददाता , रांची झारखंड ऊर्जा विकास निगम के बोर्ड की बैठक में वर्ष 2008 में नियुक्त 11 लेखा पदाधिकारियों की नियुक्ति रद्द करने का फैसला किया गया . जमशेदपुर में एपीडीआरपी में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

एपीडीआरपी योजना गड़बड़ी के आरोपी तीन पदाधिकारियों पर अभियोजन की स्वीकृति26 सौ कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला लंबित, वित्त से सहमति ली जायेगीवरीय संवाददाता , रांची झारखंड ऊर्जा विकास निगम के बोर्ड की बैठक में वर्ष 2008 में नियुक्त 11 लेखा पदाधिकारियों की नियुक्ति रद्द करने का फैसला किया गया . जमशेदपुर में एपीडीआरपी में हुई गड़बड़ी के मद्देनजर तीन अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देने का फैसला किया गया. वहीं बोर्ड ने 26 सौ कर्मचारियों को नियमित करने के प्रस्ताव पर वित्त सहमति लेने का निर्देश दिया. जमशेदपुर एपीडीआरपी में रामजी पावर को दिये गये अतिरिक्त 10 करोड़ के भुगतान की जांच करने के बाद निगरानी विभाग ने अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति मांगी है. निगरानी ने प्राथमिकी में आठ लोगों को अभियुक्त बनाया था, जिनमें चार सेवानिवृत्त हो चुके हैं. निगरानी ने शेष चार लोगों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी है. बोर्ड ने विचार-विमर्श के बाद संजीव कुमार के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देने से इनकार कर दिया. क्योंकि भुगतान के मामले में इनकी कोई संलिप्तता नहीं पायी गयी. बोर्ड ने अनियमित भुगतान के सिलसिले में वित्त नियंत्रक उमेश कुमार, लेखा निदेशक वीपी दूबे, उपलेखा निदेशक डी महापात्रा के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देने का फैसला किया. बोर्ड ने इससे पहले निगरानी जांच के समानांतर इस मामले की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त अभियंता शकील अहमद की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी. कमेटी ने सभी आरोपियों को निर्दोष बताया था. बोर्ड की बैठक में 2008 में लेखा पदाधिकारियों की हुई नियुक्ति के मामले पर चर्चा हुई. इस नियुक्ति में हुई अनियमितताओं के मद्देनजर बोर्ड ने 2008 में हुई नियुक्ति को रद्द करने का फैसला किया. बोर्ड के इस फैसले से लेखा पदाधिकारी के पद पर नियुक्त 11 लोगों की सेवा समाप्त हो जायेगी. इन नियुक्तियों सिलसिले में बोर्ड के तत्कालीन सचिव आरपी सिन्हा, मुख्य अभियंता एससी मिश्रा और उमेश कुमार की संलिप्तता पायी थी. राज्य बिजली बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष ने आरपी सिन्हा के मामले को कार्मिक विभाग के हवाले कर दिया था. जबकि एससी मिश्रा और उमेश प्रसाद के विरुद्ध बोर्ड ने ही विभागीय कार्यवाही शुरू की थी. यह कार्यवाही अभी अधूरी है. बोर्ड की बैठक में बोर्ड के दो अधिकारियों के विरुद्ध शुरू हुई विभागीय कार्यवाही को एक माह में समाप्त करने का निर्देश दिया गया. बोर्ड की बैठक में 26 सौ कर्मचारियों को नियमित करने के प्रस्ताव पर वित्त की सहमति लेने का निर्देश दिया. इसके लिए नियुक्ति नियमावाली का प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में रखा गया था. कहा गया कि अब वित्त की सहमति के बाद ही इस पर निर्णय लिया जायेगा. बोर्ड द्वारा ट्रांसमिशन कंपनी के लिए 1700 करोड़ का बजट पारित हो गया है. वहीं वितरण कंपनी के लिए 200 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित हुआ है. साथ ही सरिया, गिरिडीह में ग्रिड निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है. चित्रा कोलियरी में इसीएल के खर्चे पर एक ग्रिड निर्माण के प्रस्ताव पर मंजूरी दी गयी है. बैठक में विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एसएन वर्मा, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव बीके त्रिपाठी, वित्त सचिव एपी सिंह, वितरण कंपनी के एमडी केके वर्मा, संचरण के एमडी सुभाष सिंह समेत अन्य निदेशक उपस्थित थे.

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