शचिंद्र कुमार दास, खरसावां : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तो गुवा गोलीकांड के शहीदों के परिजनों को खोज-खोज कर नौकरी दी थी. खरसावां गोलीकांड के शहीदों के परिजनों को खोज कर उन्हें भी नौकरी दी जायेगी. मुख्यमंत्री बुधवार को खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद यहां आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.
खरसावां गोलीकांड के शहीदों के आश्रितों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी श्रद्धांजलि, कहा - मिलेगी नौकरी
शचिंद्र कुमार दास, खरसावां : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तो गुवा गोलीकांड के शहीदों के परिजनों को खोज-खोज कर नौकरी दी थी. खरसावां गोलीकांड के शहीदों के परिजनों को खोज कर उन्हें भी नौकरी दी जायेगी. मुख्यमंत्री बुधवार को खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने […]
श्री सोरेन ने कहा खरसावां गोलीकांड के जिन शहीदों के आश्रित नौकरी करने की स्थिति में नहीं होंगे, उन्हें सम्मान जनक पेंशन दी जायेगी. उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड के दस्तावेज कहीं न कहीं निश्चित रूप से होंगे. उसे खोज कर निकाला जायेगा. उसी आधार पर शहीदों की पहचान की जायेगी. इस पर जल्द ही कार्य शुरू होगा.
सीएम को भेंट की गयी पत्ते की पारंपरिक टोपी : कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को पत्ते की पारंपरिक टोपी भेंट की गयी. इस दौरान विभिन्न संगठनों की ओर से क्षेत्र की समस्याओं से जुड़ा मांग पत्र भी सौंपा गया.
शहीद स्थल पर दी श्रद्धांजलि : मुख्यमंत्री ने उपस्थित विधायकों और पार्टी नेताओं के साथ शहीद स्थल व केरसे मुंडा शिलापट्ट पर जा कर श्रद्धांजलि अर्पित की.
इस दौरान आमलोगों से मिले. प्रशासन की ओर से हेलीपैड पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
सीएम के साथ श्रद्धांजलि देनेवालों में मुख्य रूप से विधायक दशरथ गागराई, चंपई सोरेन, बन्ना गुप्ता, दीपक बिरुवा, जोबा मांझी, सविता महतो, निरल पूर्ति, सुखराम उरांव, सुमन महतो, बहादुर उरांव, दामोदर हांसदा, बाबूराम सोय, गुरुचरण बांकिरा आदि शामिल थे.
खरसावां के शहीदों की पहचान करना है चुनौती
1948 को खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए धरतीपुत्रों की पहचान करना चुनौती है. हेमंत सोरेन सरकार ने शहीद परिवारों को नौकरी और सम्मान की घोषणा की है. लेकिन 72 वर्ष बाद इस गोलीकांड के शहीद परिवारों तक पहुंचना आसान नहीं है. इस गोलीकांड में आधिकारिक तौर पर 35 लोगों की मारे जाने की सूचना है, लेकिन इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा गोलीकांड बताया जाता है.
इसमें लगभग एक हजार लोगों के मारे जाने की भी बात भी इतिहास की चर्चा में शामिल है. शहीदों से जुड़े कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. अब तक दो शहीदों की पहचान हो पायी है. खरसावां गोलीकांड के शहीदों के अरमान पूरे हों, उनके परिजनों को नौकरी व सम्मान मिले, इसके लिए सरकार को वृहत तौर पर काम करना होगा. उच्च स्तरीय कमेटी या आयोग बना कर शोधपरक काम करने की जरूरत है.
शहीदों के जो आश्रित नौकरी करने की स्थिति में
नहीं होंगे, उन्हें सम्मानजनक पेंशन देगी सरकार
उद्योग लगाने व जमीन देने वालों को मिलेगा संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता सीधे अपनी बात व समस्या को जिला से लेकर प्रदेश स्तर के पदाधिकारी व मुख्यमंत्री के समक्ष रख सकेंगे, इसकी भी जल्द ही व्यवस्था होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में उद्योग लगाने के लिए जमीन देनेवाले ठगे जाते थे, परंतु अब हमारी सरकार उद्योग लगाने व जमीन देनेवाले को संरक्षण देगी. सीएम ने कहा कि उम्मीद है कि केंद्र सरकार भी राज्य के विकास में हर संभव सहयोग करेगी.
पांच वर्ष का कलंक धोना है, भूख से कोई नहीं मरेगा
खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद सीएम ने आदि संस्कृति एवं विज्ञान संस्थान में जनसभा की. इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार की कैबिनेट की पहली बैठक में लिये गये निर्णय में एक संदेश है. अब सिर्फ वही काम होगा, जो राज्य हित में होगा. यहां सिर्फ आदिवासियों और झारखंडियों के हित में निर्णय लिये जायेंगे. झारखंड में कोई व्यक्ति भूखा नहीं मरेगा. सबको अनाज सरकार देगी. पिछले पांच वर्ष में जो कलंक लगा है, उसे धोना है.
सीएम सोफा हटवा कर साधारण कुर्सी पर बैठे
जनसभा के दौरान सीएम के लिये सोफा लगाया गया था, जबकि अन्य लोगों के लिए साधारण कुर्सी लगी थी. सीएम ने सोफा हटवा कर अन्य लोगों की तरह साधारण कुर्सी लगवायी.
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