संकट : 1915 करोड़ का पेमेंट नहीं कर सकी सरकार, दिसंबर तक लक्ष्य का 53.54% ही मिला राजस्व

रांची : वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य सरकार पर दिसंबर तक आमदनी के मुकाबले 1915 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का दबाव है.महालेखाकार के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर तक सरकार को सभी मदों में कुल 43,555.93 करोड़ रुपये राजस्व की ही आमदनी हुई है. यह निर्धारित लक्ष्य का 53.54 प्रतिशत है. दिसंबर तक सरकार का […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य सरकार पर दिसंबर तक आमदनी के मुकाबले 1915 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का दबाव है.महालेखाकार के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर तक सरकार को सभी मदों में कुल 43,555.93 करोड़ रुपये राजस्व की ही आमदनी हुई है.
यह निर्धारित लक्ष्य का 53.54 प्रतिशत है. दिसंबर तक सरकार का कुल खर्च 45471.52 करोड़ रुपये है. यानी, सरकार अपनी आर्थिक परेशानियों के कारण 1915 करोड़ का भुगतान अब तक नहीं कर सकी है. सरकार का जीएसटी मद में मुआवजा के रूप में केंद्र सरकार पर 900 करोड़ रुपये का बकाया है.
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 85,429 करोड़ रुपये का बजट विधानसभा से पारित कराया था. हालांकि, राजस्व की कमी को देखते हुए सरकार ने इसे संशोधित करके कम कर दिया है. अब चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 85,429 करोड़ के बदले कुल 81,345 करोड़ रुपये खर्च करने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है. सरकार को दिसंबर तक 81,345 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 43555.93 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है.
यह वार्षिक लक्ष्य का 53.54 प्रतिशत है. इस तरह चालू वित्तीय वर्ष के तीन महीनों में सरकार पर 46 प्रतिशत राजस्व वसूलने का दबाव है. चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दिसंबर तक सरकार को अपने वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले 54.78 प्रतिशत राजस्व की प्राप्ति हुई थी. सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अपने राजस्व लक्ष्य 37,792.87 करोड़ रुपये वेतन भत्ता, सूद अदायगी, स्थापना मद में खर्च किया है. यह दिसंबर तक सरकार की आमदनी का 86.76 प्रतिशत है.
दिसंबर तक राजस्व की स्थिति
मद लक्ष्य (करोड़ में) वसूली (करोड़ में) उपलब्धि (% में)
जीएसटी 11200.00 6273.61 56.01
स्टांप व निबंधन 700.01 445.09 63.58
भू-राजस्व 649.98 160.71 24.73
वाणिज्य कर 5050.00 2922.48 57.87
उत्पाद 1600.00 1520.06 95़ 00
केंद्रीय करों में हिस्सा 29000.46 15009.93 51.76
गैर कर राजस्व 10718.81 6526.64 60.89
जनवरी तक वाणिज्य कर ने वसूले 12000 करोड़
राज्य सरकार के वाणिज्य कर विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में रिकार्ड वसूली की है. वर्ष 2019-20 में जनवरी तक उद्योगों और व्यापारियों से वाणिज्य कर के रूप में 11,845 करोड़ रुपये वसूले गये हैं. जबकि, वर्ष 2018-19 में वाणिज्य कर विभाग द्वारा 12953.78 करोड़ रुपये का राजस्व वसूला गया था. चालू वित्तीय वर्ष में 15000 करोड़ रुपये वाणिज्य कर वसूली का लक्ष्य रखा गया है. वसूली की वर्तमान रफ्तार से निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूली की उम्मीद की जा रही है. राज्य गठन के बाद सबसे ज्यादा राजस्व उगाही मौजूदा वित्तीय वर्ष में संभावित है. वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 10,830 करोड़ रुपये वाणिज्य कर के रूप में वसूले गये थे. उसके पहले वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान विभाग ने 9,189 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया था.
भाजपा का हमला
वादा पूरा करने में बहाना बना रही है सरकार
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि प्रदेश में गठबंधन की सरकार में शामिल दलों ने घोषणा पत्र में बड़े-बड़े वादे किये थे़ इन वादों को तकनीकी रूप से पूरा करने में सभी अब अक्षम महसूस कर रहे है़ं सरकार ने बहाने बनाने भी शुरू कर दिये है़ं श्री शाहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार यह कह रहे हैं कि खज़ाना खाली है़ यह बात सब लोग जानते हैं कि सबसे ज्यादा राजस्व वसूली दिसंबर, जनवरी व फरवरी में होती है़
लेकिन सीएम हेमंत सोरेन ने इस समय का ज्यादातर उपयोग दिल्ली के कांग्रेस दरबार में हाजिरी लगाते गुजारा़ राजस्व वसूली पर ध्यान ही नहीं दिया़ अगर पहले दिन से ही मुख्यमंत्री ने राजस्व वसूली पर ध्यान दिया होता तो सरकार इस वर्ष भी लक्ष्य प्राप्त कर लेती़ श्री शाहदेव कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बिहार चुनाव के लिए झारखंड की गठबंधन सरकार को कांग्रेस ने फंड कलेक्शन का टारगेट दे दिया है़
तभी हाल के दिनों में हुए सारे टेंडर को रद्द कर दिये गये है़ं भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि झामुमो ने अपने घोषणा पत्र में पारा शिक्षकों को नियमित करने हेतु सीमित लिखित परीक्षा लेने की बात कभी नहीं कही थी़ इसका मतलब है कि सरकार अपने वादे से पलट गयी है़
सरकार को बताना चाहिए कि परीक्षा में जो लोग पास नहीं कर पायेंगे, उनका क्या होगा इसी तरह कांग्रेस और झामुमो ने पहले ही कैबिनेट में किसानों के ऋण माफी की घोषणा की थी़ सरकार बनने के एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद भी अब तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं हुआ है़ श्री शाहदेव ने कहा कि भाजपा सरकार को सकारात्मक मुद्दों पर साथ देने को आज भी तैयार है़ लेकिन जिस सरकार की बुनियाद आदिवासियों के नरसंहार, सांप्रदायिक दंगों और मंत्रियों के परिजनों और समर्थकों द्वारा की जा रही गुंडागर्दी पर रखी गयी हो, उससे सकारात्मक कदमों की अपेक्षा नहीं की जा सकती है़
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