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विधायक ने आरोप लगा कर फैसला भी सुनाया

रांची: विधायक उमाशंकर अकेला जिस मामले को निवेदन समिति में लेकर गये थे, उन्होंने उसी मामले पर फैसला सुनाया. मंगलवार को निवेदन समिति ने कई मामलों को सुनवाई की. प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीJayant Chaudhary: क्या है ऑरवेलियन-1984, जिसका मंत्री जयंत चौधरी ने किया है जिक्रJustice Yashwant Varma Case: कैसे हटाए जा सकते हैं सुप्रीम […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 10, 2014 8:40 AM

रांची: विधायक उमाशंकर अकेला जिस मामले को निवेदन समिति में लेकर गये थे, उन्होंने उसी मामले पर फैसला सुनाया. मंगलवार को निवेदन समिति ने कई मामलों को सुनवाई की.

इसमें चौपारण सामाजिक वानिकी के रेंजर अनिल कुमार सिंह का मामला भी शामिल था. इस मामले को विधायक उमाशंकर अकेला ही निवेदन समिति में लेकर गये थे. विधानसभा में भी कई बार उठा चुके हैं. मंगलवार को उन्होंने ही इस मामले की सुनवाई की और अनिल सिंह को निलंबित करने का निर्देश दे दिया. बैठक में उपस्थित वन विभाग के अधिकारियों को 19 सितंबर तक अनिल सिंह पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश भी दिया. विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता ने निवेदन करनेवाले विधायक की ओर से ही मामले की सुनवाई किये जाने पर नाराजगी जतायी है.

2.51 लाख के गबन का आरोप लगाया था : विधायक उमाशंकर अकेला ने बताया कि अनिल कुमार सिंह पर चौपारण में पदस्थापन के दौरान 2.51 लाख रुपये गबन करने का आरोप है. इस मामले में वन प्रमंडल पदाधिकारी ने रिपोर्ट भी सौंपी है. उन्होंने बैठक में वन विभाग की सचिव के उपस्थित नहीं होने पर नाराजगी जतायी. कहा कि अगली बैठक में उपस्थित नहीं होने पर उन पर अवमानना का मामला चलेगा. पीसीसीएफ डॉ डीके श्रीवास्तव को भी अगली बैठक में उपस्थित होने का निर्देश दिया.

डीवीसी को जल्द पैसा देने का निर्देश : निवेदन समिति की बैठक में अध्यक्ष उमाशंकर अकेला ने डीवीसी को नौ करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया. बरही में पानी टंकी बनाने के लिए डीवीसी को पेयजल स्वच्छता विभाग को यह राशि देनी है. उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के कई मामलों को भी सुना. कहा कि यहां काफी भ्रष्टाचार है. फैक्टरी के लोगों पर कार्रवाई नहीं करते हैं. पर्षद को भी 19 सितंबर को रिपोर्ट देने को कहा गया है.

जनार्दन प्रसाद थे पहले अध्यक्ष

विधानसभा की निवेदन समिति के सभापति पहले राजद विधायक जनार्दन पासवान थे. उनके समय में ही उमाशंकर अकेला इस मामले को लेकर निवेदन समिति में गये थे. पर अब उमाशंकर अकेला को ही इसका सभापति बना दिया गया है.

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