मंत्री योगेंद्र साव ने दिया इस्तीफा

सीएम ने मंजूर किया, राज्यपाल को भेजी अनुशंसा रांची : उग्रवादी संगठन चलाने के आरोप से घिरे राज्य के कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया. रात नौ बजे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले और अपना त्यागपत्र सौंपा. सीएम ने मंजूर करते हुए इसे राज्यपाल को भेज दिया. श्री साव ने कहा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
सीएम ने मंजूर किया, राज्यपाल को भेजी अनुशंसा
रांची : उग्रवादी संगठन चलाने के आरोप से घिरे राज्य के कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया. रात नौ बजे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले और अपना त्यागपत्र सौंपा. सीएम ने मंजूर करते हुए इसे राज्यपाल को भेज दिया. श्री साव ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से नैतिकता के आधार पर पद छोड़ा है. उन्होंने सरकारी वाहन सीएम आवास में ही छोड़ दिया. श्री साव पर कई दिनों से इस्तीफे का दबाव था.
सीएम अब निष्पक्ष जांच करायें : इस्तीफे के बाद योगेंद्र साव ने कहा : मैंने बिना किसी दबाव में नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है, ताकि सीएम मामले की निष्पक्ष जांच करा सकें.मीडिया में तरह-तरह की बातें आने से सरकार की छवि खराब हो रही थी. सीएम की परेशानी को देखते हुए इस्तीफा दिया. सीएम से मामले की गहन जांच कराने को कहा है. श्री साव ने कहा : सीएम से उग्रवादी, नेता, कॉरपोरेट व अफसर के गंठजोड़ की गहन जांच कराने की भी मांग की है.
ताकि नेताओं के उग्रवादियों से संपर्क का मामला सामने आ सके. उन्होंने प्रतिपक्ष के नेता अजरुन मुंडा पर टीपीसी के साथ सांठगांठ का आरोप भी लगाया.
कांग्रेस ने नहीं दिया साथ : योगेंद्र साव को इस बात का मलाल है कि पार्टी ने उनका साथ नहीं दिया. कहा कि वह कांग्रेस के अनुशासित सिपाही रहे हैं. शाम पांच बजे प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद से बात की थी. उन्होंने कहा था कि वह सोमवार को रांची आ रहे हैं, तब इस मामले में निर्णय लेंगे. फिर मैंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत से बात करने का प्रयास किया, पर उनका मोबाइल स्वीच ऑफ था. मीडिया के दबाव को देखते हुए उन्होंने खुद जाकर सीएम को इस्तीफा सौंप दिया.
अन्य मंत्रियों पर सीएम फैसला लेंगे : जब पूछा गया कि आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है, तो फिर आरोपों से घिरे अन्य मंत्रियों सुरेश पासवान और हाजी हुसैन अंसारी से इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा है, योगेंद्र साव ने कहा : मैंने अपनी नैतिकता निभायी है. अन्य मंत्रियों पर फैसला लेने का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री के पास है. उन्हें अपने विवेक से फैसला करना है.
बरखास्तगी की थी तैयारी
सीएम हाउस के सूत्रों ने बताया कि कृषि मंत्री योगेंद्र साव इस्तीफा नहीं देते, तो सरकार उन्हें बरखास्त करने की तैयारी कर चुकी थी. श्री साव को मौका दिया गया था कि वह खुद अपना इस्तीफा सौंप दें.
दिन भर क्या हुआ
– योगेंद्र साव कांग्रेस कार्यालय गये. नहीं देख पाये जांच कमेटी की रिपोर्टत्नफिर प्रोजेक्ट भवन गये, इस्तीफे की प्रति मीडिया को दिखायी त्नशाम पांच बजे प्रदेश कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद से बात की त्नप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को कई बार फोन किया, पर बात नहीं हो सकीत्नशाम सात बजे सीएम आवास पहुंचे. दो घंटे तक रहे
दिन भर होती रही इस्तीफे की चर्चा
योगेंद्र साव देते रहे अलग-अलग बयान
रांची : उग्रवादियों को संरक्षण देने के आरोपों में घिरे मंत्री योगेंद्र साव के इस्तीफे को लेकर शुक्रवार को झारखंड के सियासी गलियारे में उहापोह की स्थिति बनी रही. दिन भर मंत्री के इस्तीफे की अफवाह उड़ती रही. मंत्री योगेंद्र साव दिन भर तरह-तरह के दावे करते रहे. कांग्रेस भवन, प्रोजेक्ट से लेकर एयरपोर्ट तक दौड़ते रहे. कभी पार्टी को घेरा, तो कभी नरम पड़े. इधर प्रदेश कांग्रेस से लेकर मंत्री को दिल्ली के हां-ना का इंतजार था.
पहले मंत्री इस्तीफा लेकर कांग्रेस भवन पहुंचे थे. मीडिया के लोगों से कहा कि अभी भी इस्तीफा लेकर आया हूं. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत तब लोहरदगा में थे. देर शाम वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने पहुंचे और अपनी सफाई दी. इससे पहले एयरपोर्ट में सुबोधकांत सहाय से मिल कर अपनी बातें रखीं. आखिरकार देर शाम उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
जांच कमेटी फरजी, जांच नहीं कर सकती
कांग्रेस भवन पहुंचे मंत्री योगेंद्र साव ने कहा कि पार्टी द्वारा बनायी गयी जांच कमेटी फरजी है. पहले कमेटी अपनी जांच करा ले. हमें इसके सर्टिफिकेट की चिंता नहीं है. जनता सर्टिफिकेट देगी. मेरे जांच का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी विधायक दल के नेता को है. कल जो पार्टी में आये हैं, उनको अधिकार नहीं है. श्री साव ने कहा कि जांच कमेटी से मेरे क्षेत्र में आक्रोश है. वैश्य समाज मर्माहत है. मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं. सीआइडी की जांच अब तक शुरू नहीं हुई. कोयला, लोहा और बालू चोरी का मामला उठाया, इसलिए मुझे साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है. रुपये का खेल चल रहा है.
अध्यक्ष जांच करा सकते हैं
कांग्रेस भवन में पार्टी को कोसने वाले मंत्री योगेंद्र साव शाम को अपने बयान से पलट गये. उन्होंने कहा कि मैंने नहीं कहा है कि जांच कमेटी फरजी है. मंत्री श्री साव ने प्रभात खबर को प्रतिक्रिया देते हुए कहा : रिपोर्ट आयेगी, तो मैं अध्यक्ष को स्पष्टीकरण दे दूंगा. कमेटी को मेरा भी पक्ष सुनना चाहिए. मैं कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ पार्टी का सदस्य भी हूं. पार्टी अध्यक्ष को विशेषाधिकार है. वह जांच करा सकते हैं. पार्टी आला कमान को जो आदेश आयेगा, उसे पूरा करूंगा. मुझसे आला कमान इस्तीफा मांगेगा, तो मैं दे दूंगा. अभी मुझे कोई संदेश नहीं आया है.
मंत्री बनते ही विवादों में रहे योगेद्र
रांची : हेमंत सोरेन सरकार से इस्तीफा दे चुके मंत्री योगेंद्र साव पद संभालने के बाद से ही विवादों में घिरे रहे. अपने बयानों से सरकार से लेकर पार्टी आला कमान तक की किरकिरी करा चुके हैं श्री साव. मंत्री पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने एक कार्यक्रम में बयान दिया कि मंत्री बनने के लिए कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व के पास जूता सिलाई से लेकर चंडी पाठ तक करना पड़ता है. इस बयान से कांग्रेस पार्टी खुद ही घिर गयी थी. दिल्ली के आला नेताओं ने इसके लिए योगेंद्र साव की खिंचाई भी की.
इसके बाद वह सरकार के खिलाफ भी बयानबाजी करते रहे. कभी कोयला चोरी, तो कभी बालू के मामले पर अपनी सरकार को घेरते रहे. मंत्री योगेंद्र साव को कई बार केंद्रीय नेतृत्व की फटकार लगी. यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन मंत्री जयराम रमेश ने मंत्री के संसदीय क्षेत्र में एक योजना में बाधा पहुंचाने के मामले में उन्हें खरी-खोटी सुनायी थी. प्रभारी बीके हरि प्रसाद ने भी मंत्री को अनर्गल बयानबाजी न करने की हिदायत दी थी.
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