जेके में चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने की विभिन्न दलों से चर्चा

राज्य में चुनाव के लिए उपयुक्त समय नहीं : नेकाकांग्रेस-पीडीपी ने कहा, दिसंबर में हो सकता है चुनावश्रीनगर. चुनाव आयोग ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के समय के फैसले की कवायद के तहत राज्य की राजनीतिक पार्टियों से शनिवार को बातचीत की. जहां, नेशनल कांफ्रेंस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में पूर्ण आयोग […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

राज्य में चुनाव के लिए उपयुक्त समय नहीं : नेकाकांग्रेस-पीडीपी ने कहा, दिसंबर में हो सकता है चुनावश्रीनगर. चुनाव आयोग ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के समय के फैसले की कवायद के तहत राज्य की राजनीतिक पार्टियों से शनिवार को बातचीत की. जहां, नेशनल कांफ्रेंस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में पूर्ण आयोग से कहा कि पिछली माह की बाढ़ के चलते राज्य में मची भारी तबाही के मद्देनजर चुनाव के लिए समय उपयुक्त नहीं है वहीं, सत्तारुढ़ गंठबंधन में शामिल कांग्रेस और पीडीपी तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने इस साल के अंत तक योजना के अनुरूप चुनाव करने की हिमायत की. कश्मीर घाटी के 46 विधानसभा क्षेत्रों में से कम से कम 25 बाढ़ से विभिन्न स्तर पर प्रभावित हुए हैं. इसके मद्देनजर नेशनल कांफ्रेंस ने चुनाव में विलंब करने की सलाह दी ताकि इस बीच राहत एव पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.विभिन्न दलों के तर्कनेशनल कांफ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने चुनाव आयोग के साथ मुलाकात के बाद पत्रकारों को बताया, ‘चुनाव कराने का वक्त नहीं है, क्योंकि लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुई अपनी जिंदगी फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.’ प्रदेश कांग्रेस समिति के उपाध्यक्ष गुलाम नबी मोंगा ने कहा कि उनकी पार्टी ने आयोग से कहा कि चुनाव कराने में देरी से राज्य में राज्यपाल का शासन लगाना पड़ेगा. मोंगा ने कहा, ‘राज्यपाल शासन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्थान नहीं ले सकता. सिर्फ चुने हुए प्रतिनिधि ही लोगों की सेवा बेहतर ढंग से कर सकते हैं. बाढ़ के चलते राज्य में हुई मानव त्रासदी को राहत पहुंचाने के लिए जनप्रतिनिधियों की जरूरत है.’ पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर ने कहा कि उनकी पार्टी ने समय पर चुनाव कराने का अपना पूर्व रुख दोहराया है. शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में चुनाव आयोग के साथ अपनी मुलाकात के बाद माकपा राज्य सचिव मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा, ‘राहत और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए, लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सिर्फ चुने हुए प्रतिनिधि इस मोर्चे पर काम कर सकते हैं.’

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