हैदरनगर में मुहर्रम का आगाज

फोटो:- 26हुसपीएच01- शिया वक्फ बोर्ड के मोतवल्ली सैयद अयूब हुसैनहैदरनगर, पलामू.शनिवार को चांद दिखने के बाद से ही हैदरनगर क्षेत्र में मुहर्रम का आगाज हो गया है. हैदरनगर में शिया समुदाय के लोग भी निवास करते हैं, इसीलिए यहां का मुहर्रम अन्य इलाकों से अलग होता है. चांद रात से ही लोग मलिसों व करबला […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 26, 2014 11:02 PM

फोटो:- 26हुसपीएच01- शिया वक्फ बोर्ड के मोतवल्ली सैयद अयूब हुसैनहैदरनगर, पलामू.शनिवार को चांद दिखने के बाद से ही हैदरनगर क्षेत्र में मुहर्रम का आगाज हो गया है. हैदरनगर में शिया समुदाय के लोग भी निवास करते हैं, इसीलिए यहां का मुहर्रम अन्य इलाकों से अलग होता है. चांद रात से ही लोग मलिसों व करबला के बयानात में मशगूल हो जाते हैं. सुन्नी समाज के लोग चौक को जगाने व परंपरागत खेलों के अलावा मातम व मरसिया में लग जाते हैं. शिया समुदाय की औरतें चांद रात से ही सिंदूर, चूड़ी व शृंगार त्याग दिया करती हैं. मर्द व औरतें पान खाने से लेकर वह सारे कार्य नहीं करते, जो खुशी का प्रतीक हो. उनके घर दस दिन तक मुकम्मल मातम सा माहौल रहता है. शिया वक्फ बोर्ड के मोतवल्ली सैयद अयुब हुसैन के अनुसार करबला की जंग में फौज-ए- हुसैनी को जो तकलीफें दी गयीं, उससे सभी वाकिफ हैं. बावजूद इसके उन्होंने हक का दामन नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि शिया समुदाय की औरतें दो माह आठ दिन तक विधवा की तरह जीवन बिताती हैं. उन्होंने बताया कि इस मौके पर खास मजलिस के लिए मुंबई के मौलाना साबिर रजा व बिहार के मुजफफरपुर के मौलाना अकील अब्बास हैदरनगर पहुंच चुके हैं. सुन्नी समुदाय द्वारा अंसार मुहल्ला में जलसा-ए-हुसैनी का आयोजन किया गया है. जलसा की शुरुआत चांद रात से ही कर दी गयी है.