जेपीएससी नियुक्ति घोटाले की जांच बंद

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआइ से जांच कराने पर असहमति से उलझन में सीबीआइशकील अख्तररांची. झारखंड लोक सेवा आयोग(जेपीएससी) नियुक्ति घोटाले की चल रही सीबीआइ जांच अब बंद हो गयी है. विद्याभूषण बनाम राज्य सरकार व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस घोटाले की जांच सीबीआइ से कराने पर असहमति व्यक्त किये जाने के […]

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआइ से जांच कराने पर असहमति से उलझन में सीबीआइशकील अख्तररांची. झारखंड लोक सेवा आयोग(जेपीएससी) नियुक्ति घोटाले की चल रही सीबीआइ जांच अब बंद हो गयी है. विद्याभूषण बनाम राज्य सरकार व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस घोटाले की जांच सीबीआइ से कराने पर असहमति व्यक्त किये जाने के बाद सीबीआइ उलझन में है. सीबीआइ जांच से असहमति का मामला सिर्फ जेपीएससी-2 के लिए है या सभी मामलों के लिए इस बिंदु पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से फिलहाल अघोषित रूप से नियुक्ति घोटाले से जुड़े 10 मामलों की जांच बंद है.हाइकोर्ट के निर्देश के आलोक में सीबीआइ ने जेपीएससी नियुक्ति घोटाले में कुल 12 प्राथमिकी दर्ज की थी. इनमें से डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति में हुई गड़बड़ी के मामले में आरोप पत्र दायर किया जा चुका है. फार्मेसी कॉलेज व्याख्याता नियुक्ति के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की जा चुकी है. शेष 10 मामलों में अभी जांच चल रही थी. इस बीच 11 जुलाई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील नंबर 6311/2014 की सुनवाई के बाद जेपीएससी-2 में नियुक्त अधिकारियों के सिलसिले में हाइकोर्ट द्वारा दिये गये फैसले को रद्द कर दिया. हाइकोर्ट ने अपने फैसले में जेपीएससी-2 में नियुक्त अधिकारियों के काम और वेतन पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में यह भी कहा था कि ‘वह सीबीआइ जांच के लिए दिये गये निर्देश को निरस्त करने के पक्ष में है’. अदालत के इस मंतव्य के बाद सीबीआइ में दो महत्व बिंदुओं पर उलझन पैदा हो गयी है. पहला यह कि अदालत इस मंतव्य में टाइपिंग की गलती से ‘नहीं’ शब्द छूट तो नहीं गया? क्योंकि अब तक किसी अदालत ने किसी एजेंसी द्वारा की जा रही जांच को बीच में रोकने आदेश नहीं दिया है. दूसरा यह कि अगर टाइपिंग में किसी तरह की गलती नहीं हुई तो अदालत के इस मंतव्य से सिर्फ जेपीएससी-2 नियुक्ति घोटाले की जांच प्रभावित होगी या सभी मामले प्रभावित हो जायेंगे? सीबीआइ में इस बिंदु पर अलग अलग राय है. कुछ अधिकारियों का मानना है कि इस मंतव्य से सिर्फ जेपीएससी-2 की जांच प्रभावित होगी. कुछ अन्य अधिकारियों का मानना है कि सीबीआइ जांच से संबंधित हाइकोर्ट के एक ही आदेश के आलोक में 12 मामले दर्ज हुए थे. इसलिए इस मंतव्य से सभी मामले प्रभावित होंगे. इन तकनीकी बिंदुओं पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से जेपीएससी घोटाले के बाकी बचे 10 मामलों की जांच अघोषित रुप से बंद है.जेपीएससी घोटाले में दर्ज मामले- सहायक व कनीय अभियंता नियुक्ति-विश्वविद्यालयों में डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्ति.-सीमित परीक्षा- जेपीएससी में वित्तीय अनियमितता-पात्रता व व्याख्याता नियुक्ति.- चिकित्सक नियुक्ति- प्रथम सिविल सेवा परीक्षा- द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा-फार्मेसी कॉलेज में प्राचार्य व व्याख्याताओं की नियुक्ति-शिक्षक नियुक्ति-सहकारिता पदाधिकारी परीक्षा–मार्केटिंग सुपरवाइजर नियुक्ति परीक्षा

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