संवाददाता रांचीझारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा की महासचिव, वंदना टेटे ने असम की घटना की निंदा करते हुए इसे राष्ट्रीय शर्म का विषय बताया है. उन्होंने कहा कि इनसानियत को शर्मसार कर देनेवाली यह घटना केंद्रीय व राज्य सरकारों की संवैधानिक स्थिति पर सवाल खड़ा करती है. इस घटना में 80 से अधिक लोग मारे गये हैं और हजारों लोगों के जान-माल का नुकसान हुआ है. कोई भी सरकार यह कह कर अपने दायित्व से मुंह नहीं मोड़ सकती कि ये घटनाएं दुर्गम इलाकों में हो रही हैं. आजादी के 67 सालों बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से अगर राज्य की वह आबादी वंचित है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव की मूल जड़ अशिक्षा, बेरोजगारी और आजीविका के परंपरागत स्रोतों से मूल निवासियों की बेदखली है़ झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा इस दुखद समय में मारे गये निदार्ेष आदिवासी और मूलवासी जनता के साथ खुद को शामिल करती है़ उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति को सामान्य बनाने के लिए अविलंब कदम उठाये और एक ठोस दीर्घकालिक नीति बनाये़
राष्ट्रीय शर्म का विषय है असम की घटना : वंदना टेटे
संवाददाता रांचीझारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा की महासचिव, वंदना टेटे ने असम की घटना की निंदा करते हुए इसे राष्ट्रीय शर्म का विषय बताया है. उन्होंने कहा कि इनसानियत को शर्मसार कर देनेवाली यह घटना केंद्रीय व राज्य सरकारों की संवैधानिक स्थिति पर सवाल खड़ा करती है. इस घटना में 80 से अधिक लोग मारे […]
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