धीरेंद्र कुमार ने झारक्राफ्ट को दी गति, दो करोड़ से सौ करोड़ तक पहुंचा कारोबार

रांची: वर्ष 2006 में महज दो करोड़ रुपये से उद्योग विभाग द्वारा झारक्राफ्ट की स्थापना की गयी थी. तत्कालीन उद्योग सचिव संतोष सत्पथी ने झारक्राफ्ट का गठन किया और वन सेवा अधिकारी धीरेंद्र कुमार को इसका एमडी बनाया. तब मुश्किल का समय था. राशि कम थी. पर श्री कुमार ने ठान लिया कि इसे आगे […]

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रांची: वर्ष 2006 में महज दो करोड़ रुपये से उद्योग विभाग द्वारा झारक्राफ्ट की स्थापना की गयी थी. तत्कालीन उद्योग सचिव संतोष सत्पथी ने झारक्राफ्ट का गठन किया और वन सेवा अधिकारी धीरेंद्र कुमार को इसका एमडी बनाया. तब मुश्किल का समय था. राशि कम थी. पर श्री कुमार ने ठान लिया कि इसे आगे ले जाना है. गांव-गांव घूमे, लोगों का विश्वास जीता. उन्होंने रेशम कृषकों व बुनकरों को जोड़ा. महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बनाया. इनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की. झारखंड में सिल्क उत्पादन एक आंदोलन का रूप लेने लगा. यह सब हो सका एक अधिकारी धीरेंद्र कुमार की मेहनत से.

सिल्क उत्पादन में नंबर वन राज्य झारखंड

तसर सिल्क उत्पादन में पूरे देश में 80 फीसदी हिस्सेदारी झारखंड की है. झारखंड 2500 टन उत्पादन करनेवाला देश का नंबर वन राज्य है. झारक्राफ्ट द्वारा समृद्धि व उन्नत मशीन की डिजाइन तैयार की गयी. जिसका पेटेंट कराया गया है. इस मशीन की सहायता से कोकून से धागे बनाये जाते हैं.

दी गयी एमडी को विदाई

कार्यकाल के अंतिम दिन उद्योग विभाग के विशेष सचिव सह झारक्राफ्ट के प्रबंध निदेशक धीरेंद्र कुमार के सम्मान में नेपाल हाउस स्थित सभागार में विदाई समारोह का आयोजन किया गया. उद्योग सचिव हिमानी पांडेय, विशेष सचिव एटी मिश्र भी उपस्थित थे. श्री कुमार ने कहा कि वह चाहते हैं कि विभाग के सभी लोग पूरी लगन से काम करें. इसी दिन उद्योग विभाग के कर्मचारी लीलावती कुजूर, राजेश्वर प्रसाद, विजय रजक व जयशंकर प्रसाद भी सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्हें भी विदाई दी गयी. इसके पूर्व एटी मिश्र ने श्री कुमार से झारक्राफ्ट एमडी का प्रभार लिया.

साक्षात्कार में कहा

शो मस्ट गो ऑन

प्रभात खबर से बातचीत करते हुए झारक्राफ्ट के निवर्तमान एमडी धीरेंद्र कुमार ने कहा कि झारक्राफ्ट हमेशा अपनी बुलंदियों पर रहे यही उनकी कामना है. शो मस्ट गो ऑन. संस्था रहे आगे बढ़े यह उनकी चाहत है और झारखंड की गरीब जनता की भी. सेवानिवृत्ति के बाद श्री कुमार ने कहा कि फिलहाल तो पूरा देश घूमने की योजना है. काम की वजह से छुट्टियां नहीं मिलती थीं. जिसके चलते कहीं घूमने नहीं जा पाता था. अब इस शौक को पूरा करना है.

अन्य राज्यों को सेवा

धीरेंद्र कुमार ने कहा कि वह सेवानिवृत्ति के बाद भी इस सेक्टर से जुड़े रहेंगे. भारत सरकार के रेशम विभाग से कंसलटेंट का ऑफर मिला है. इसके तहत वह इसी सेक्टर से जुड़े रहेंगे और अन्य राज्यों में भी तसर विकास के लिए कार्य करते रहेंगे. ताकि दूसरे राज्यों में भी तसर का विकास हो, लोगों को रोजगार मिल सके. श्री कुमार ने कहा कि स्वरोजगार खासकर ग्रामीण अशिक्षित महिलाओं के लिए यह एक अच्छा माध्यम है. जरूरत है इसे करने की.

कैसे मिली सफलता

धीरेंद्र कुमार ने बताया कि समयबद्ध और योजनाबद्ध कार्यक्रम बनाया. योग्य लोगों की टीम खड़ी की. फिर कोई कारण नहीं है कि आप असफल होंगे. कोई काम करना है तो उसमें डूब कर करना पड़ता है. झारक्राफ्ट के लिए भी ऐसा ही किया. पूरी टीम ने काफी लगन से काम किया.

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