रिम्स: हॉस्टल व मेस में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

रांची : रिम्स के हॉस्टल नंबर एक से सात में सीसीटीवी कैमरे लगेंगे. हॉस्टल के मुख्य द्वार, कॉरीडोर व मेस में भी कैमरे लगाये जायेंगे. यह निर्णय शुक्रवार को रिम्स निदेशक डॉ एसके चौधरी की अध्यक्षता में सभी विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया. डॉ चौधरी ने बताया कि लड़कियों के हॉस्टल […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : रिम्स के हॉस्टल नंबर एक से सात में सीसीटीवी कैमरे लगेंगे. हॉस्टल के मुख्य द्वार, कॉरीडोर व मेस में भी कैमरे लगाये जायेंगे. यह निर्णय शुक्रवार को रिम्स निदेशक डॉ एसके चौधरी की अध्यक्षता में सभी विभागाध्यक्षों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया. डॉ चौधरी ने बताया कि लड़कियों के हॉस्टल में भी कैमरे लगाये जायेंगे.
अगले सप्ताह सीनियर विद्यार्थियों के साथ बैठक बुलायी गयी है, जिसमें मामले को सुलझाने का प्रयास किया जायेगा. बैठक में चिकित्सकों ने कहा कि प्रशासन से आग्रह किया जाये कि रिम्स परिसर में पुलिस पिकेट बनायी जाये. ताकि, किसी तरह की घटना पर काबू पाया जा सके. बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि हॉस्टल में रहने
वाले विद्यार्थियों को अब खुद से
खाना नहीं बनाना होगा. इसकी जिम्मेवारी रिम्स प्रबंधन लेगा.
रिम्स प्रबंधन अब मेस के लिए आउटसोर्सिग करेगा.
नियमित पेट्रोलिंग की बात उठी
बैठक में रिम्स परिसर में नियमित पुलिस पेट्रोलिंग की भी बात उठी. चिकित्सकों ने कहा कि रिम्स परिसर में नियमित रूप से पेट्रोलिंग हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन को पत्र लिख कर आग्रह किया जायेगा.
क्या होता है हॉस्टल में, एक छात्र ने बताया
जब से इस कॉलेज में हमारा नामांकन हुआ है, तब से यहां मैं प्रताड़ित किया जाता रहा हूं. बहाना खोज कर बिना वजह पीटा जाता है. मैं यहां पढ़ने आया हूं न कि मार खाने. पीटने वालों में केवल मैं ही नहीं बल्कि पीजी कर रहे विद्यार्थी भी शामिल हैं. व्हाट्स अप पर धमकी भी मिलती है. हद तो तब हो गयी जब सिनर्जी के मैटर को लेकर मेरे साथ मारपीट की गयी. मैं तो इतना डर गया हूं कि 13 फरवरी से होने वाली परीक्षा में भी शामिल नहीं हुआ. मुङो इस बात का कतई दु:ख नहीं है कि मुङो पीटा गया. मुङो परीक्षा में शामिल नहीं होने का दुख है. मेरे माता-पिता ने लाखों रुपये खर्च कर मेरा नामांकन कराया.
पर यह शिक्षण संस्थान अखाड़ा बन गया है. अपशब्द भी कहे जाते हैं. मैं ही नहीं, सारे स्टूडेंट इस कदर डरे हुए हैं कि परीक्षा भी देना नहीं चाहते. लड़कियों को भी नहीं छोड़ा जाता. उन्हें भी किसी न किसी तरीके से प्रताड़ित किया जाता है. ऐसा लगता है कि मेरे माता-पिता का सपना केवल सपना ही रह जायेगा. (पीड़ित छात्र का नाम प्रकाशित नहीं किया गया है)
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