आवास बोर्ड का लॉटरी से आवंटन रद्द

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड राज्य आवास बोर्ड द्वारा 20 अगस्त 2011 को किये गये प्लॉट आवंटन को रद्द करने का आदेश दिया है.अनियमितता की शिकायतें मिलने के बाद इसकी जांच करायी गयी थी.मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनकी वजह से अनियमितता हुई, उनकी जिम्मेवारी तय की जाये और दोषियों को चिह्न्ति कर उनके […]

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रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड राज्य आवास बोर्ड द्वारा 20 अगस्त 2011 को किये गये प्लॉट आवंटन को रद्द करने का आदेश दिया है.अनियमितता की शिकायतें मिलने के बाद इसकी जांच करायी गयी थी.मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनकी वजह से अनियमितता हुई, उनकी जिम्मेवारी तय की जाये और दोषियों को चिह्न्ति कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये. साथ ही आवंटन प्रक्रिया नये सिरे से शुरू की जाये.
क्या है मामला : आवास बोर्ड द्वारा राज्य भर में आवास बोर्ड के प्लॉट आवंटन के लिए आवेदन मंगाये गये थे. कुल 3500 आवेदन आये थे, जिनमें से केवल रांची के लिए ही 2285 आवेदन थे. हरमू हाउसिंग कॉलोनी में प्लॉट के लिए 1906 आवेदन आये थे. 20 अगस्त 2011 को लॉटरी के जरिये 500 लोगों के नाम निकाले गये थे. गड़बड़ी की शिकायत पर सरकार ने लॉटरी आवंटन को होल्ड कर दिया था. जांच चल रही थी.
पत्नी की हाजिरी बनाते थे डॉ राजेश्वर केस दर्ज होगा
रांची : कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालय (इएसआइ) कोकर में पदस्थापित डॉ राजेश्वर प्रसाद अपनी चिकित्सक पत्नी की भी हाजिरी बनाते थे. उनके नाम पर मरीजों को भी देखते थे. मुख्यमंत्री ने डॉ राजेश्वर प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का केस करने का आदेश दिया है.
क्या है मामला : श्रम विभाग द्वारा इएसआइ कोकर की जांच करायी गयी. वहां डॉ राजेश्वर प्रसाद व उनकी पत्नी डॉ पूनम राज पदस्थापित थीं. जांच में पाया गया कि डॉ पूनम राज अस्पताल से अनुपस्थित रहती थीं.
उनके पति डॉ राजेश्वर प्रसाद द्वारा पत्नी की उपस्थिति दर्ज की जाती थी. स्वयं मरीज देखते थे और उसे अपनी पत्नी डॉ पूनम राज के नाम पर दर्शाते थे. जांच में आरोप सत्य पाये गये. मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उक्त आदेश दिया है.
आइएफएस अफसर आरके सिन्हा होंगे बरखास्त
रांची : मुख्यमंत्री ने आइएफएस अधिकारी व प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के पूर्व सदस्य सचिव आरके सिन्हा को बरखास्त करने का आदेश दिया है. मुख्य सचिव से उनकी बरखास्तगी की प्रक्रिया तुरंत आरंभ करने को कहा है. विभागीय जांच में आरके सिन्हा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अजिर्त करने की पुष्टि हो चुकी है. वन विभाग द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी. आरोप को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिया है.
निलंबित भी हो चुके हैं सिन्हा : भारतीय वन सेवा के अधिकारी आरके सिन्हा को अगस्त 2010 में राष्ट्रपति शासन के दौरान तत्कालीन राज्यपाल एमओएच फारूक ने भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया था. आरोप था कि प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव रहते हुए उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अजिर्त की. उनके खिलाफ क्रिमिनल केस का भी आदेश दिया गया था. विभागीय जांच की प्रक्रिया चल रही थी, जो अब पूरीहुई है.
आयकर छापे में पता चला थी बेनामी संपत्ति
मधु कोड़ा के कार्यकाल में आरके सिन्हा फरवरी 2007 में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव के पद पर नियुक्त किये गये थे. 16-17 जनवरी 2010 को जब आयकर विभाग ने देश भर में 70 स्थानों पर छापा मारा था. आरके सिन्हा के आवास पर भी छापा मारा गया था. उनके पास कई बेनामी संपत्ति का पता चला था. कई बैंक एकाउंट, एलआइसी पॉलिसी, निवेश के दस्तावेज व जेवर पकड़े पकड़े गये थे. आयकर की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने उन्हें निलंबित करने का आदेश दिया था.
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