14 शिक्षकों को कल्याण कोष से मिले 8.89 लाख

– हृदय रोग, लीवर, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं शिक्षक – राज्य गठन के बाद पहली बार शिक्षकों को कोष से मिली राशि – पांच शिक्षकों को एक -एक लाख व दो को मिले 75-75 हजार रांची : शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष समिति से पहली बार शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए राशि स्वीकृत की गयी. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
– हृदय रोग, लीवर, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं शिक्षक
– राज्य गठन के बाद पहली बार शिक्षकों को कोष से मिली राशि
– पांच शिक्षकों को एक -एक लाख व दो को मिले 75-75 हजार
रांची : शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष समिति से पहली बार शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए राशि स्वीकृत की गयी. राशि स्वीकृत करने के लिए गठित कमेटी की बैठक शनिवार को झारखंड एकेडमिक काउंसिल के सचिव मोहन चांद मुकिम की अध्यक्षता में हुई. राशि के लिए कुल 16 शिक्षक व कर्मचारियों के आवेदन पर विचार किया गया. इनमें से 14 आवेदकों को राशि देने को स्वीकृति दी गयी.
एक शिक्षक को अधिकतम एक लाख व न्यूनतम नौ हजार रुपये तक स्वीकृत किये गये. पांच आवेदकों को एक-एक लाख रुपये देने, चार को 50-50 हजार, दो को 75-75 हजार, एक को 20 हजार, एक को दस हजार व एक को नौ हजार रुपये दिये गये. जैक द्वारा गत वर्ष शिक्षक-कर्मचारी कल्याण कोष का गठन किया गया था.
बैठक में समिति के सदस्य जैक के संयुक्त सचिव अरविंद झा, तुलसी दास, बालकृष्ण प्लस टू उच्च विद्यालय की प्राचार्या दिव्या सिंह, शिक्षक संघ के प्रतिनिधि गंगा प्रसाद यादव, डॉ रघुनाथ सिंह, अरविंद सिंह, यशवंत विजय, अमरनाथ झा, हरिहर प्रसाद कुशवाहा व अन्य शामिल थे.
कोष से इन परिस्थिति में मिलती है राशि
ऐसे शिक्षक जो किडनी, हृदय रोग, लीवर, कैंसर ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हो, अथवा परीक्षा कार्य से आने-जाने के क्रम में गंभीर रूप से दुर्घटना ग्रस्त को शिक्षक कोष से सहायता दी जाती है.
शिक्षक को आवेदन के साथ-साथ संबंधित जिला के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह असैनिक शल्य चिकित्सा पदाधिकारी का प्रमाण पत्र अथवा अन्य मामलों में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज भेल्लोर, पीजीआइ चंडीगढ़, एसजीपीजीआइ लखनऊ, टीएमएच मुंबई, शंकर नेत्रलय चेन्नई, एलबी प्रसाद नेत्र चिकित्सा संस्थान हैदराबाद, मेहरबाइ टाटा अस्पताल जमशेदपुर, बिड़ला हार्ट रिसर्च सेंटर कोलकाता द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र मान्य होता है. किसी शिक्षक कर्मचारी को एक बार अनुदान मिलने के पांच वर्ष तक दूसरा अनुदान नहीं मिलता.
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