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दवाई दोस्त क्या करता है?

राजीव बरोलिया जेनरिक दवाओं के थोक व खुदरा मूल्य में काफी अंतर होता है. इसलिए हमने यह निर्णय लिया कि हम जेनरिक कंपनियां द्वारा निर्मित इन दवाओं की आपूर्ति कम से कम 50 से लेकर 80 प्रतिशत कम मूल्य में करेंगे. हमारी चैरिटी की दुकान सिर्फ अपना खर्च निकालेगी, ताकि दुकान बिना किसी समस्या के […]

राजीव बरोलिया

जेनरिक दवाओं के थोक व खुदरा मूल्य में काफी अंतर होता है. इसलिए हमने यह निर्णय लिया कि हम जेनरिक कंपनियां द्वारा निर्मित इन दवाओं की आपूर्ति कम से कम 50 से लेकर 80 प्रतिशत कम मूल्य में करेंगे. हमारी चैरिटी की दुकान सिर्फ अपना खर्च निकालेगी, ताकि दुकान बिना किसी समस्या के चल सके.

यदि बिक्री बढ़ती है, तो आगे हम कीमत में और कमी करेंगे. क्योंकि यह नो प्रॉफिट व नो लॉस के आधार पर खोला गया. मधुमेह और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों की रोजमर्रा की दवाओं से आप काफी पैसे बचा सकेंगे. बच्चों की दवा भी यहां लागत मूल्य पर उपलब्ध होंगी.

हमने इस उपक्रम का नाम दवाई दोस्त रखा, ताकि जो लोग महंगी दवाई खरीदने के लिए संघर्ष करते हैं, वही दवा उन्हें हम कम कीमत पर उपलब्ध करा सकें. बाजार में उपलब्ध सभी दवा जेनरिक दवा के समतुल्य नहीं होती. प्रतिस्पर्धा के कारण भारत में बड़ी संख्या में उपलब्ध ब्रांड्स में से कई ब्रांड अन्य के मुकाबले सस्ते होते हैं. भारत में उपलब्ध आंकड़ों से इनकी कीमत और विकल्प के बारे में पता चलता है. हालांकि गरीब इनके बारे में नहीं जानते और इन तक पहुंच पाना उनके लिए आसान नहीं है. हमारे शिक्षक फार्मासिस्ट आपको इन आम संसाधनों के बदले प्रतिष्ठित और सस्ता विकल्प की सलाह देंगे, जो हमारी नि:शुल्क सेवा होगी.

भारतीय डॉक्टर अत्यंत व्यस्त और काफी तनावपूर्ण माहौल में कार्य करते हैं. जहां सिर्फ एक दवा के करीब 1300 ब्रांड हैं. वहां डॉक्टरों के पास इनकी कीमत जानना भव है. ऐसे में उन्हें उन कंपनी पर भरोसा करना पड़ता है, जो उन्हें अपनी दवा बिक्री के लिए अभिप्रेरित करती है. जो दवाई के मूल्य से परेशान हैं, तो वे हमारी दवाई दोस्त की मदद से अपने डॉक्टर से मिल कर सलाह ले सकते हैं. उदाहरण के लिए वह डॉक्टर के पास जाये और कहे-डॉक्टर, मैनकाइंड की इस दवा का संयोजन भी वही है, जो आपने लिखी है और इसकी कीमत भी आधी है, तो क्या मैं इन्हें ले सकता हूं.

हमारा आपसे आग्रह है कि आप अपने डॉक्टर से राय लिए बिना कोई भी दवा न लें. भले हमलोग मरीजों को दवाओं के विकल्प के बारे में डॉक्टर से बात करने की सलाह देते हैं, लेकिन फिलहाल हमारे पास इन ब्रांडेड दवाओं का स्टॉक नहीं है. मरीज जहां से वह चाहे, इन्हें खरीद सकते हैं. यदि बाजार में दवाई की उपलब्धता को लेकर उन्हें कोई परेशानी होती है, तो हम उनकी सहायता करने को तैयार हैं. अत्यधिक जानकारी से भरी हमारी सूची www.dawaidost.co.in पर देखी जा सकती है. फिलहाल यह सूची इंगलिश में है. इस सूची को हम शीघ्र हिंदी में अनुवाद कर लोगों के लिए उपलब्ध करवायेंगे. इसके अलावा हम फेसबुक पेज पर भी उपलब्ध हैं. दवाई दोस्त, आपके सुझाव और फीडबैक आमंत्रित हैं. हम अच्छे, शिक्षित और उत्साही फार्मासिस्टों को हमसे जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं. साथ ही हम मेडिकल सुविधाओं से परिपूर्ण या वैसे गरीब बहुल इलाकों की तलाश में हैं, जहां हमें ‘दवाई दोस्त’ की अन्य इसकी शाखाएं खोलने के लिए कम से कम 120 स्क्वायर फीट की जगह मिल सके. यदि आप स्वयं एक फार्मासिस्ट हैं और आपके पास स्थान भी मौजूद है, तो हम आपको अपना व्यावसायिक कैरियर बनाने में मदद कर सकते हैं.

इसके लिए हम आपको ट्रेनिंग देंगे व कंप्यूटर सिस्टम व दवाएं भी उपलब्ध करायेंगे, सिर्फ आपको हमारी सूची की दवाएं दवाई दोस्त के कम मूल्य पर बेचनी होगी. इन सबके बावजूद फिर वहीं सवाल-भारत में जेनरिक दवाओं की खुदरा मूल्य इतने अधिक क्यों है? ब्रांडेड दवाओं के थोक मूल्य जेनरिक दवाओं से 10-20 गुना ज्यादा क्यों है?

सर्वश्रेष्ठ उत्तर देने वाले को मेरी ओर से पांच हजार रुपये पुरस्कार दिया जायेगा. अगर आप दवाई के खर्च से परेशान हैं तो अपने नजदीकी ‘दवाई दोस्त’ के पास जाएं और हजारों रुपये बचायें. ‘दवाई दोस्त’ एक गैर लाभकारी संगठन है. इसकी स्थापना स्व प्रेम कुमार पोद्दार और स्व रुक्मानंद बरोलिया की स्मृति में की गयी है.

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Prabhat Khabar Digital Desk
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