भविष्य देखते हुए बनायें प्लान

एनएच के किनारे लगे पेड़ों की कटाई पर हाइकोर्ट ने कहा रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राष्ट्रीय राजमार्गो के किनारे पेड़ कटाई को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस वीरेंदर सिंह व जस्टिस पीपी भट्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से कहा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
एनएच के किनारे लगे पेड़ों की कटाई पर हाइकोर्ट ने कहा
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को राष्ट्रीय राजमार्गो के किनारे पेड़ कटाई को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस वीरेंदर सिंह व जस्टिस पीपी भट्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से कहा कि विजन की कमी के कारण समस्याएं पैदा होती हैं. योजना बनाने में विजन व कमिटमेंट की कमी है. सरकार को फ्यूचर देखते हुए प्लान बनाना चाहिए. माइंड सेट बदलें.
लोगों को जागरूक करें. ऐसा प्रयास किया जाये, कि कम से कम पेड़ कटे. जितना पेड़ कटेगा, उससे दोगुना पेड़ लगाया जाये. दुर्घटना की संभावना पैदा कर रहे पेड़ों को हटाया जा सकता है. जो पेड़ बचाया जा सकता है, उसे निश्चित रूप से बचाया जाये. अनावश्यक रूप से पेड़ों को काटा जाना बरदाश्त नहीं किया जायेगा. जड़ समेत पेड़ को उखाड़ कर उसे दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जाये. ऐसी तकनीक विकसित हो चुकी है. उस तकनीक का सहारा लेकर पेड़ों को बचाया जाये. खंडपीठ ने कहा कि राज्य में पैसे की कोई कमी नहीं है.
विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए. खंडपीठ ने पर्यावरण संरक्षण पर बात रखते हुए कहा कि शहर के बदले गांव की ओर चलें. स्कूलों के बच्चों को तैयार किया जाये. बच्चों का सहयोग लेकर ग्रामीण इलाके में पौधा रोपण हो. पेड़ लगा कर ही झारखंड की ब्यूटी को वापस लाया जा सकता है.
इस कार्य में झालसा भी पूरा सहयोग देगा. वह भी सरकार का ही एक अंग है. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व एमीकस क्यूरी वरीय अधिवक्ता दिलीप जेरथ ने सड़कों के अतिक्रमण को हटाने के लिए उचित आदेश देने का आग्रह किया.
हस्तक्षेप याचिकाकर्ता वन क्षेत्र पदाधिकारी अनिल कुमार सिंह ने जंगल से बाहर के वृक्षों के संरक्षण के लिए कानून बनाने का आग्रह किया. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विनोद पोद्दार व अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार ने पक्ष रखा. गौरतलब है कि पेड़ों की कटाई को गंभीरता से लेते हुए हाइकोर्ट ने उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
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