गुणवक्तापूर्ण शक्षिा से कोई समझौता नहीं : डॉ नीरा यादव

गुणवक्तापूर्ण शिक्षा से कोई समझाैता नहीं : डाॅ नीरा यादवशिक्षा मंत्री ने कई स्कूलों का किया निरीक्षण वरीय संवाददाता, रांची स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग की मंत्री डाॅ नीरा यादव ने सोमवार को कई स्कूलों का आैचक निरीक्षण किया. आैचक निरीक्षण से शिक्षकों में हड़कंप मच गया. मंत्री ने प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को निर्देश देते […]

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गुणवक्तापूर्ण शिक्षा से कोई समझाैता नहीं : डाॅ नीरा यादवशिक्षा मंत्री ने कई स्कूलों का किया निरीक्षण वरीय संवाददाता, रांची स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग की मंत्री डाॅ नीरा यादव ने सोमवार को कई स्कूलों का आैचक निरीक्षण किया. आैचक निरीक्षण से शिक्षकों में हड़कंप मच गया. मंत्री ने प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में गुणवक्तापूर्ण शिक्षा से समझाैता नहीं किया जा सकता है. विद्यालयों में गुणवक्तापूर्ण शिक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने का उन्होंने निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि विद्यालयों में जो भी कमियां है, उसे 15 दिनों के अंदर दूर कर ली जाये. यदि ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया जायेगा. निरीक्षण के दाैरान विद्यालयों में कई कमियां पायी गयी. मंत्री द्वारा पूछे गये कई सवालों का प्रधानाध्यापकों से संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया. आधारभूत सुविधाएं, मध्याह्न भोजन योजना, शाैचालय, रैंप, पेयजल, पुस्तकालय, प्रयोगशालाअों में उपलब्ध कराये गये साइंटिफिक उपकरणों का भी निरीक्षण किया गया. मंत्री ने बच्चों से पठन-पाठन के विषय में जानकारी हासिल की. बच्चों ने जवाब भी दिया. हिनू यूनाइटेड हाइस्कूल में निरीक्षण के दाैरान आठ शिक्षक उपस्थित पाये गये. वहीं 197 में से 76 विद्यार्थी उपस्थित थे. मंत्री द्वारा पूछे जाने पर बताया गया कि दीपावली व छठ के दाैरान विद्यार्थियों की उपस्थिति कम रहती है. मंत्री डाॅ यादव ने परमवीर अलबर्ट राजकीयकृत मध्य विद्यालय का निरीक्षण किया. यहां 300 विद्यार्थी पढ़ते हैं. तीन शाैचालय चालू अवस्था में पाया गया. चार चापानलों से भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. आयरन अधिक होने के कारण पानी गंधयुक्त पाया गया. मध्याह्न भोजन में चावल हल्का पीलापन लिये हुए पाया गया. श्री डोरंडा कन्या पाठशाला का निरीक्षण किया. यहां कक्षा छह तक की पढ़ाई होती है, जिसमें 540 बच्चे नामांकित हैं. 307 बच्चे अध्ययनरत थे. बताया गया कि यहां बच्चों को भोजन में अंडा नहीं दिया जाता है. जैन धर्म के प्रभाव के कारण बच्चों को फल या केला दिया जाता है. सेब महंगा है. सस्ता होने पर बच्चों को सेब दिया जायेगा. प्रतिदिन पढ़ाये जानेवाले विषयों का रूटीन मांगा गया, लेकिन प्रधानाध्यापक दिन के आधार पर तैयार रूटीन नहीं दिखा पाये. सेठ सीताराम विजवर्गीय हाइस्कूल डोरंडा में शाैचालय की कोई व्यवस्था नहीं पायी गयी. इस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जतायी. उन्होंने शीघ्र शाैचालय का निर्माण कराने का निर्देश दिया.

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