बच्चों ने नहीं दिया सहारा, वृद्धा खा रही ठोकर

बच्चों ने नहीं दिया सहारा, वृद्धा खा रही ठोकरअपनों ने ही दिया जख्म, हैं छह बच्चे, कोई नहीं रखता है साथफोटो : सिटी के आज के फोल्डर में ट्रैक पर भी लता रानी़ रांची 73 वर्ष की जानकी देवी़ हाथ में लाठी और कंधे पर एक बैग. जानकी देवी कोई साधारण महिला नहीं है़ इनके […]

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बच्चों ने नहीं दिया सहारा, वृद्धा खा रही ठोकरअपनों ने ही दिया जख्म, हैं छह बच्चे, कोई नहीं रखता है साथफोटो : सिटी के आज के फोल्डर में ट्रैक पर भी लता रानी़ रांची 73 वर्ष की जानकी देवी़ हाथ में लाठी और कंधे पर एक बैग. जानकी देवी कोई साधारण महिला नहीं है़ इनके पति गंगा सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध की लड़ाई भी लड़ी़ जानकी देवी अपने बैग में पति की यादें संजो कर चलती है़ं बैग में स्वर्गीय पति की वर्दी और दुर्लभ तसवीरें रखती हैं. जानकी के साथ बस अब पति की यादें है़ं ऐसा नहीं कि जानकी को बच्चे नहीं है़ं भरा-पूरा परिवार है. छह बेटे-बेटियों का भरण-पोषण करते हुए जानकी ने दुनिया भर की जल्लात सही़ अब वही बच्चे अपनी मां को साथ नहीं रखते़ इस दुख में बूढ़ी मां की आंखें शायद ही कभी सूखी हो़ सोमवार को यह वृद्ध महिला रांची पहुंची़ आरा में उनका पुश्तैनी मकान है़ रांची से पुराना संबंध है, सो ठौर तलाशने यहां पहुंच गयी. लेकिन अभी दो शाम की रोटी पर भी आफत है़ पति रांची में रह चुके हैं, इसलिए भरोसा है कि कोई सहारा मिल जायेगा़ 10 बीघा जमीन की थी मालकिन, दंबगों ने हड़प ली जानकी बताती है कि आरा में 10 बीघा जमीन थी़ इसकी कीमत 15 से 20 करोड़ होगी़ पुश्तैनी जमीन पर बच्चों ने भी ध्यान नहीं दिया़ अकेली जानकी को देख कर दंबगों ने जमीन हड़प ली़ वह अपनी जमीन के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है़ बच्चे अपने दुनियादारी में व्यस्त, मां भटक रहीजानकी के छह बच्चे थे़ दो बेटी और चार बेटे़ बड़े बेटे की बीमारी के कारण मृत्यु हो चुकी है़ दूसरे बेटे रांची में ही एक प्रिंटिंग प्रेस चलाते है़ं तीसरी बेटी है़ वह दिल्ली में रहती है़ चौथी बेटी रांची में रहती है़ पांचवें बेटे के बारे में जानकी को पता नहीं है़ छठा बेटा बेंगलुरु में रहता है़ जानकी बताती है कि छोटा बेटा रवि के साथ किसी भी तरह का कोई सपंर्क नहीं है. जानकी ने कहा कि बेटे से तो कोई उम्मीद नहीं है, कभी-कभार बेटी रजनी सहयोग करती है़ वह कहती है कि बेटी के घर कभी-कभी रहने जाती है. रांची के नामकुम में रहते थे पति, एक साथ रहता था पूरा परिवार जानकी बताती है कि वह अपने पति गंगा सिंह के साथ नामकुम में रह चुकी है़ यहां पूरे परिवार के साथ सभी लोग हंसी-खुशी रहते थे. यहीं से बेटियों की शादी हुई़ 1991 में पति के मृत्यु के बाद पूरा परिवार बिखर गया़ पति बीमार रहने लगे़ बीच में पति आर्मी की नौकरी छोड़ फार्मासिस्ट बन गये़ जानकी बताती हैं कि आर्मी में रहने के दौरान उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की लड़ाई भी लड़ी़ पर आज वह खुद दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. जानकी देवी की इच्छा है कि सरकार उसके रहने-खाने का प्रबंध कर दे़ अपनी हक की लड़ाई वह खुद लड़ेंगी.

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