रांची: लोगों द्वारा चुकायी गयी टैक्स की राशि हड़प कर उसका निजी उपयोग करने के आरोपी रांची नगर निगम के तीन कर्मियों को नगर आयुक्त प्रशांत कुमार ने गुरुवार को बरखास्त कर दिया. बरखास्त होनेवालों में चीफ अकाउंट अफसर बसंत नारायण तिवारी, सहायक कैशियर अमरेंद्र कुमार सिन्हा व टैक्स कलेक्टर परमहंस कुमार सिंह शामिल हैं. […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
रांची: लोगों द्वारा चुकायी गयी टैक्स की राशि हड़प कर उसका निजी उपयोग करने के आरोपी रांची नगर निगम के तीन कर्मियों को नगर आयुक्त प्रशांत कुमार ने गुरुवार को बरखास्त कर दिया. बरखास्त होनेवालों में चीफ अकाउंट अफसर बसंत नारायण तिवारी, सहायक कैशियर अमरेंद्र कुमार सिन्हा व टैक्स कलेक्टर परमहंस कुमार सिंह शामिल हैं. तीनों निगमकर्मियों पर आरोप था कि उन्होंने निगम द्वारा टैक्स में वसूले गये 20 लाख से अधिक राशि का गबन व दुरुपयोग किया.
यह मामला वर्ष 2015 की शुरुआत में निगम के कार्यपालक पदाधिकारी रामकृष्ण कुमार ने पकड़ा था. इसके बाद मामले की जांच की गयी. पाया गया कि इन तीनों कर्मचारियों ने 20 लाख से अधिक राशि बैंक में जमा नहीं की है. इसके बाद इन्हें निलंबित कर दिया गया था और उन पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी थी.
सबने स्वीकारी गलती
गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच समिति के समक्ष टैक्स कलेक्टर परमहंस कुमार सिंह ने अपने लिखित बयान में स्वीकार किया कि 31 मार्च 2014 को उन्होंने टैक्स में मिले 11.78 लाख रुपये सहायक कैशियर अमरेंद्र सिन्हा के पास जमा किया. कैशियर ने इसकी रसीद नहीं दी. कैशियर ने कहा कि बाद में पावती रसीद ले लेना.
क्या है मामला
जांच समिति ने पाया कि रोकड़ बही के अनुसार 31 मार्च 2014 को कुल 8 लाख 48 हजार 824 रुपये टैक्स में मिले, जिसे आठ माह बीस दिन बाद 10 दिसंबर 2014 को निगम के बैंक खाते में जमा किया गया. रोकड़ बही में 8 लाख 48 हजार 824 रुपये बैंक में जमा करने के दो रसीद चिपकाये गये थे. इनमें से एक पर कोई तिथि व बैंक की मुहर अंकित नहीं थी. रोकड़ बही में 10 दिसंबर 2014 की प्रविष्टि के अनुसार कुल 13.5 लाख रुपये टैक्स में मिले.
बैंक में मात्र 4.56 लाख रुपये ही जमा किये गये. इस मामले में रोकड़पाल द्वारा बही में अंकित किया गया है कि 31 मार्च 2014 के मद में प्राप्त 8.48 लाख रुपये मुख्य लेखा पदाधिकारी बसंत नारायण तिवारी के मौखिक आदेश पर 10 दिसंबर 2014 को जमा किया. मुख्य लेखा पदाधिकारी ने रोकड़ बही कैशियर से ले ली. जांच समिति ने पाया कि 10 दिसंबर 2014 को प्राप्त राशि में से 8.48 लाख रुपये अभी तक निगम के बैंक खाते में जमा नहीं किये गये. जांच समिति ने कुल 20 लाख 27 हजार रुपये की गड़बड़ी में तीनों कर्मचारियों की मिलीभगत पायी. उसके बाद तीनों कर्मचारियों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए और 23 फरवरी 2015 को निलंबित कर दिया गया.
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