रांची: संताल-परगना में भूमि दर को लेकर जो विवाद उठा है, दरअसल इसके पीछे गोड्डा जिले में जमीन की दर में अप्रत्याशित वृद्धि एक प्रमुख कारण बना है. इसमें एक बीघा को एक कट्ठा मान कर पूर्व की दर को आधार बनाते हुए गोड्डा के तत्कालीन उपायुक्त ने डिसमिल में जमीन की दर का निर्धारण कर दिया, जबकि पूर्व में बीघा में जमीन की दर का निर्धारण होता था. गोड्डा के उपायुक्त ने बीघा को कट्ठा समझ कर दर निर्धारण को बड़ी खामी बताते हुए राज्य सरकार को पत्र भी लिखा था, जिसे भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने लिपकीय भूल कहा है.
आधिकारिक सूत्राें के मुताबिक गोड्डा के उपायुक्त ने 30.5.2015 को झारखंड के निबंधन महानिरीक्षक को पत्र लिखा था आैर एक ही वर्ष में अप्रत्याशित रूप से 10 से 22 गुणा तक भूमि दर में वृद्धि होने की जानकारी दी. साथ ही कहा कि इस अप्रत्याशित वृद्धि का कोई कारण परिलक्षित नहीं होता है. गाेड्डा उपायुक्त ने ही इसमें सुधार की आवश्यकता बताते हुए निबंधन महानिरीक्षक से दिशा-निर्देश मांगा था. इसके बाद सरकार ने दर निर्धारण के लिए कमेटी गठित की. फिर कमेटी ने दर निर्धारण का फार्मूला तय किया, जिसे लेकर विधानसभा में हंगामा हुआ और सरकार ने दर स्थगित करते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पुन: कमेटी गठित कर दी है.
78 हजार बीघा को मान लिया 78 हजार रुपये कट्ठा: गोड्डा के उपायुक्त ने निबंधन महानिरीक्षक को लिखे पत्र में कहा है कि गोड्डा जिले में वर्ष 2010-11 में उपायुक्त सह जिला निबंधन पदाधिकारी द्वारा समस्त ग्रामीण क्षेत्रों में जमाबंदी जमीन मूूल्य 60 हजार रुपये प्रति बीघा निर्धारित की. पुन: एक अगस्त 2012 को पूर्व वित्तीय वर्ष 2012-13 में संपूर्ण गोड्डा जिले की जमाबंदी जमीन का मूल्य 78 हजार रुपये प्रति बीघा निर्धारित की गयी. इसके बाद एक जनवरी 2013 को गोड्डा के ग्रामीण क्षेत्रों में 28944 रुपये प्रति डिसमिल, पोड़ैयाहाट में 13986 रुपये प्रति डिसमिल, ठाकुरगंगटी में 20790 रुपये प्रति डिसमिल, बोआरीजोर में 12758 रुपये प्रति डिसमिल व सुंदरपहाड़ी में 12758 रुपये प्रति डिसमिल दर निर्धारित की गयी.
उपायुक्त ने लिखा था कि वित्तीय वर्ष 2012-13 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में समस्त भूमि का मूल्य पहले 78 हजार रुपये प्रति बीघा अर्थात 3900 रुपये प्रति कट्ठा या 1300 रुपये प्रति डिसमिल होता है. इस प्रकार जमीन के मूल्य में 10 से 22 गुणा की वृद्धि हुई है, जो बिल्कुल ही अप्रत्याशित है. इससे संबंधित संचिका को देखने से इस प्रत्याशित वृद्धि का कारण परिलक्षित नहीं हो पा रहा है.
वर्ष 2013 में मूल्य का निर्धारण प्रति डिसमिल के आधार पर
उपायुक्त ने लिखा है कि पूर्व में शहरी क्षेत्रों एवं बाजार क्षेत्र में जमीन का मूल्य प्रति कट्ठा एवं ग्रामीण क्षेत्र में प्रति बीघा के अनुसार होता था. वित्तीय वर्ष 2013 में पहली बार मूल्य का निर्धारण प्रति डिसमिल के आधार पर हुआ है. शहरी क्षेत्र में प्रति कट्ठा को प्रति डिसमिल में बदला गया, जिसके कारण मूल्य में वृद्धि हुई. पूरे ग्रामीण क्षेत्र में प्रति बीघा के स्थान पर 78 हजार रुपये प्रति कट्ठा समझ कर मूल्य निर्धारित किया गया. इसमें 20 प्रतिशत वृद्धि शामिल है, जो लगभग 28600 रुपये प्रति डिसमिल होता, जो 28944 रुपये के अत्यंत ही गरीब है.
निर्धारण में पायी गयी खामियां
गोड्डा उपायुक्त ने लिखा है कि गोड्डा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जमाबंदी जमीन के मूल्य निर्धारण में जो खामियां हुई है, उसमें सुधार की आवश्यता है. चूंकि मुद्रांक(लिखत का न्यून मूल्यांकन निवारण, संशोधन) नियमावली 2012 में उपायुक्त /जिला निबंधन पदाधिकारी स्वयं अपने आदेश की समीक्षा नहीं कर सकते हैं. उपायुक्त ने इस आधार पर सरकार से दिशा निर्देश मांगा. इसके बाद सरकार ने कमेटी गठित की. कमेटी के सुझाव पर भू-राजस्व विभाग ने संशोधन आदेश जारी किया. इसके बाद संताल परगना के जिलों के उपायुक्तों ने संशोधित दर जारी किया.
