डीडीसी पद को लेकर विवाद, सरकार व अफसर आमने-सामने

रांची : उप विकास आयुक्त के छह पदों को डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स या भारतीय वन सेवा को देने (कैबिनेट के फैसले) के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व सरकार आमने-सामने की स्थिति में हैं. झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने इसके विरोध में सरकार को पत्र लिखा है. साथ ही आग्रह भी किया है कि 18 […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : उप विकास आयुक्त के छह पदों को डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स या भारतीय वन सेवा को देने (कैबिनेट के फैसले) के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व सरकार आमने-सामने की स्थिति में हैं.

झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने इसके विरोध में सरकार को पत्र लिखा है. साथ ही आग्रह भी किया है कि 18 पद राज्य प्रशासनिक सेवा के संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों का है, ऐसे में उनका पद कम नहीं किया जाये. वहीं सरकार के अफसर इस फैसले को सही मान रहे हैं. उनका कहना है कि इस फैसला का असर विकास पर सकारात्मक पड़ेगा.
झासा ने जिला इकाइयों से मांगी राय
झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) ने अपनी जिला इकाइयों से डीडीसी के पदों की कटौती पर राय मांगी है. शनिवार को संघ ने सारे जिले को पत्र भेज कर उनसे लिखित राय मांगी है कि वे इस मामले पर क्या सोचते हैं. उन्हें इससे अवगत कराय गया है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के 18 डीडीसी पदों को कम करके 12 कर दिया गया है. इस पर कैबिनेट ने सहमति दे दी है. अब संघ आंदोलन की रणनीति बना रहा है़.
क्या कहते हैं राज्य सेवा के अफसर
राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) के अफसरों का कहना है कि पहले से उनके लिए 18 डीडीसी के पद चिह्नित हैं. इस सेवा के अफसर शुरू से ही फील्ड में काम करते रहे हैं. ऐसे में इनका कार्यानुभव भी बेहतर रहता है.डीडीसी जिला परिषद के सचिव होते हैं. साथ ही इंदिरा आवास, वित्त आयोग, मनरेगा, विधायक कोष से लेकर अन्य विकास योजनाअों का काम देखते हैं. निकासी व व्ययन पदाधिकारी भी वे होते हैं. आउट सोर्सिंग से बनाये जानेवाले डीडीसी को निकासी व व्ययन पदाधिकारी भी बनाना ठीक नहीं होगा. छह पदों की कटौती उनकी पूरी सेवा की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रही है. वे कहते हैं कि हमारा पैतृक विभाग कार्मिक है. ऐसे में उनकी सेवा पैतृक में ही होनी चाहिए और तबादला भी वहीं से होना चाहिए.
क्या कहते हैं वरीय अधिकारी
इस मामले में सरकार के अफसरों का कहना है कि 24 में से छह आइएएस अफसरों का कोटा है. इसमें भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर ही रहते रहे हैं. इनके 18 में से छह पदों को कम किया गया है. वे चाहते हैं कि इस पद पर योग्यता से अफसर दिये जायें. वन सेवा के अफसर भी फील्ड में काम करते हैं. वे भी सक्षम होते हैं. ऐसे में उनके कार्यानुभव को लेकर यह पद क्यों नहीं दिया जाये? वहीं कृषि सेवा, इंजीनियरिंग सेवा, योजना सेवा के अफसरों को भी यह पद योग्यता पर दिया जा सकता है. जब ये अफसर आइएएस बन सकते हैं, तो डीडीसी क्यों नहीं? रही बात सेवा की, तो ग्रामीण विकास ही डीडीसी को कंट्रोल करता है. ऐसे में उसके पास ही यह पद रहे, तो बेहतर होगा.
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