झारखंड में, गरमी में पानी के लिए तरसेंगे लोग

रांची. सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट (2013-14) में कहा गया है कि झारखंड में वर्तमान रफ्तार से भूगर्भ जल का दोहन होता रहा, तो भविष्य में पानी मिलना मुश्किल हो जायेगा़ अगले एक दशक में रांची में भूगर्भ जल खत्म हो जायेगा. राज्य में हर साल औसतन 1400 मिमी बारिश होती है, पर जलस्तर […]

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रांची. सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट (2013-14) में कहा गया है कि झारखंड में वर्तमान रफ्तार से भूगर्भ जल का दोहन होता रहा, तो भविष्य में पानी मिलना मुश्किल हो जायेगा़ अगले एक दशक में रांची में भूगर्भ जल खत्म हो जायेगा. राज्य में हर साल औसतन 1400 मिमी बारिश होती है, पर जलस्तर औसतन छह फुट कम हो रहा है. 80% जल बेकार बह रहा है. बोर्ड ने धनबाद और रामगढ़ को क्रिटिकल जोन के रूप में चिह्नित किया है.

रांची, बोकारो, चास, जमशेदपुर, झरिया, गोड्डा के शहरी इलाके को सेमी क्रिटिकल जोन में रखा है. 38% क्षेत्र हर समय सूखे की स्थिति में राज्य में भूगर्भ जल का भंडार मात्र 500 मिलियन क्यूबिक मीटर है. पहाड़ी इलाका होने के कारण झारखंड में होनेवाली बारिश का ज्यादातर पानी (80% सरफेस व 74 % ग्राउंड वाटर) बह जाता है.

भूमिगत जल के स्तर को रिचार्ज करने का पर्याप्त इंतजाम नहीं है.
भूगर्भ जल कम हो रहा क्योंकि…
मकान, अपार्टमेंट व ऊंची बिल्डिंग से वर्षा जल रिचार्ज में 60 प्रतिशत तक कमी.
डीप बोरिंग की संख्या में लगातार वृद्धि.
आबादी के साथ पानी की खपत में भी वृद्धि.
तालाब लुप्त होने के कगार पर.

झारखंड में कई नदियां सूखीं
गुमला : दक्षिणी कोयल और शंख नदी में पानी नहीं
पलामू : कोयल नदी में सिर्फ एक इंच पानी
लातेहार : औरंगा नदी के पाट पर सिर्फ 10 फीसदी पानी
लोहरदगा : कोयल नदी में सिर्फ एक से दो फीट पानी
दुमका : हिजला नदी नवंबर में ही सूखी
देवघर : डढ़वा नदी में पानी हुआ कम
जामताड़ा : अजय नदी नवंबर में ही सूखी
गोड्डा : कझिया नदी में सिर्फ छह इंच पानी
गढ़वा : दानरो नदी में सिर्फ चार इंच पानी, बांकी व तहले नदी सूखी, कनहर और पंडा नदियों में काफी कम पानी
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