खुशखबरी: शहर में आंध्र से आनेवाली मछली की मांग घटी

रांची : मछली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है झारखंड. इस कारण आंध्रप्रदेश की मछली की मांग कम हो गयी है. पहले जहां हर दिन तीन से चार ट्रक आंध्र की मछली की बिक्री होती थी. अब एक ट्रक भी नहीं बिक पा रही है. सोमवार को आंध्र प्रदेश से एक ट्रक (एपी-11(डब्ल्यू) […]

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रांची : मछली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है झारखंड. इस कारण आंध्रप्रदेश की मछली की मांग कम हो गयी है. पहले जहां हर दिन तीन से चार ट्रक आंध्र की मछली की बिक्री होती थी. अब एक ट्रक भी नहीं बिक पा रही है.

सोमवार को आंध्र प्रदेश से एक ट्रक (एपी-11(डब्ल्यू) 9035 ) मछली रांची आयी थी. धुर्वा रोड स्थित फिश मार्केट में दिन भर ट्रक खड़ा रहा. इसमें 10 टन मछली थी. दिन भर में मात्र ढाई से तीन टन मछली की ही बिक्री हुई. ट्रक के चालक सह ऑनर एम श्रीनिवास राव ने बताया कि पहली बार ऐसा हुअा कि मछली की मांग कम हो गयी है. पिछले कुछ दिनों से यही स्थिति है. बिहार में स्थिति अलग है. वहां मछली की खूब बिक्री हो रही है. इस कारण आंध्र प्रदेश से आने वाले ट्रकों की संख्या कम हो गयी है. अब ट्रक बिहार की ओर जाने लगा है. यह हालात रांची में अब लगभग रोजाना का हो गया है. लोगों को भी लोकल मछली ज्यादा भा रही है.
पांच से सात टन लोकल मछली
धुर्वा स्थित मत्स्य विभाग के फिश मार्केट में हर दिन करीब पांच से सात टन मछली आ रही है. यह रांची और आसपास के जिलों से आ रही है. लोकल मछली आने से दूसरे राज्ये के मछली की डिमांड कम हो गयी है. मत्स्य निदेशक राजीव कुमार बताते हैं कि यह अच्छा संकेत है. इससे लगता है कि हम मछली के क्षेत्र में आत्म निर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं. लोग ताजा मछली खाना चाहते हैं. हम कोशिश में हैं कि लोगों की जरूरत के हिसाब से मछली उपलब्ध करा सकें.
1.15 लाख टन मछली की फिलहाल होती है जरूरत
राज्य में करीब 1.15 लाख टन मछली की जरूरत है. राज्य में करीब इतनी ही मछली का उत्पादन हो रहा है. विभाग का दावा है कि बहुत जल्द ही हम जरूरत से ज्यादा मछली का उत्पादन करने लगेंगे. दूसरे राज्यों में मछली भेजने की स्थिति में होंगे. इसकी तैयारी भी विभागीय स्तर पर शुरू कर दी गयी है.
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