चिरुडीह में निहत्थों पर लाठी चार्ज करने का आरोप

रांची : एनटीपीसी के पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा 17 मई को चिरुडीह तिलैयाटांड़ में धरना दे रहे लोगों पर हुए लाठी चार्ज को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की टीम ने गलत करार दिया है. 18 जून को एआइपीएफ, विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की टीम ने लाठीचार्ज के मामले की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : एनटीपीसी के पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा 17 मई को चिरुडीह तिलैयाटांड़ में धरना दे रहे लोगों पर हुए लाठी चार्ज को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की टीम ने गलत करार दिया है.
18 जून को एआइपीएफ, विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की टीम ने लाठीचार्ज के मामले की घटनास्थल पर जाकर जांच की. एक जांच रिपोर्ट भी तैयार की है. जांच टीम में स्टेन स्वामी, अरविंद अविनाश, प्रशांत राही, अनिल अंशुमन व शिखा राही शामिल थे.
जांच रिपोर्ट में लिखा गया है कि टीम ने पकरी-बरवाडीह कोल परियोजना का मुख्य इलाका बड़कागांव प्रखंड के विभिन्न गांवों का दौरा किया. पाया गया है कि एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा लंबे समय से इस कोल परियोजना के जमीन अधिग्रहण का किसानों ने लगातार विरोध किया है.
बावजूद इसके क्षेत्र में कोयला खनन का ठेका दो निजी कंपनियों को देकर सबसे पहले हाल ही में चिरुडीह तिलैया टांड़ में काम शुरू करा दिया गया, जिसके खिलाफ आसपास के किसानों (रैयतों) ने भी 31 मार्च 2016 से खनन स्थल के समीप शांतिपूर्ण ढंग से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया.
17 मई को जब सैकड़ों की तादाद में जुटे किसान धरना में बैठे हुए थे, तभी बड़कागांव थाना प्रभारी राम दयाल मुंडा कुछ पुलिस वालों को लेकर आये. अचानक से बिना किसी चेतावनी या पूर्व सूचना के सैकड़ों पुलिसवाले ने गंदी-गंदी गालियां देते हुए ताबड़तोड़ लाठियां बरसानी शुरू कर दी. हर तरफ भगदड़ और चीख-पुकार मच गयी. सैकड़ों की तादाद में घायल होकर लोग गिरते-पड़ते भागने लगे.
चिरुडीह तिलैया टांड़ में निहत्थे ग्रामीणों पर लाठी चार्ज के बाद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 300 से 400 की संख्या में हथियारबंद पुलिसवालों ने आसपास के सभी गांवों पर हमला बोल दिया. बच्चा, बूढ़ा, किशोर, महिला जो जहां मिले, बुरी तरह से पीटा गया.
जांच टीम ने ग्रामीणों से बातचीत पर आधारित एक लघु फिल्म भी बनायी है, जो यू ट्यूब पर भूमि अधिग्रहण के लिए पुलिस जुल्म : बड़कागांव, झारखंड के रूप में उपलब्ध है. जांच टीम ने जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीण किसानों समेत इनकी आवाज उठा रहे कर्णपुरा बचाओ संघर्ष समिति व जन्मभूमि रक्षा समिति के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे प्रशासन द्वारा थोपे जाने का आरोप लगाया है.
लिखा है कि बड़कागांव प्रखंड के कार्यपालक दंडाधिकारी की ओर से 31 नामजद लोगों समेत सैकड़ों अज्ञात पर जुलूस निकाल कर पथराव करने, पुलिस की राइफल छीनने, सरकारी काम में बाधा डालने, हत्या का प्रयास करने जैसी कई संगीन धाराएं लगा कर गैर जमानती मुकदमे दर्ज किये गये हैं. जांच टीम ने अपने निष्कर्ष में लिखा है कि एनटीपीसी द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों व इनके पक्ष में आवाज उठानेवाले जन संगठनों के कार्यकर्ताओं पर पुलिस प्रशासन द्वारा किया जा रहा दमन व फर्जी मुकदमे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है.
किसी भी प्रकार के जमीन अधिग्रहण के लिए संवैधानिक कानूनी प्रक्रिया का दृढ़ता से पालन करना अनिवार्य है, जो यहां नहीं दिखा. टीम ने 17 मई को चिरुडीह तिलैयाटांड़ में लाठीचार्ज करने के जिम्मेवार अधिकारियों व पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है. टीम ने सभी फर्जी मुकदमे वापस लेने, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों की आम सहमति लिए बगैर परियोजना कार्य किए जाने पर रोक लगाने व जनमत संग्रह की भी मांग की है.
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