रांची: सीबीआइ ने नक्शा घोटाले में फंसे इंजीनियर राजेंद्र त्रिपाठी को दंडित करने की अनुशंसा की थी, पर सरकार ने उसे भवन प्रमंडल एक का प्रभारी सहायक अभियंता बना दिया है. कनीय अभियंता राजेंद्र त्रिपाठी 2006-07 में आरआरडीए में पदस्थापित थे. इस अभियंता ने आरआरडीए में अपने पदस्थापन के दौरान कर्तव्य में लापरवाही बरती थी.
नक्शा घोटाले मेें इस अभियंता की भूमिका की जांच के बाद सीबीआइ ने सरकार से इसके खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की थी. सीबीआइ ने सरकार को भेजे गये पत्र में इस इंजीनियर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने और कठोर दंड देने की अनुशंसा की थी, पर सरकार ने इसे कठोर दंड देने के बदले भवन निर्माण प्रमंडल-एक का प्रभारी सहायक अभियंता बना दिया. भवन निर्माण विभाग का यह प्रमंडल काम के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के बंगलों की मरम्मत आदि का काम इस प्रमंडल के माध्यम से होता है. इस भवन निर्माण प्रमंडल पर बिना टेंडर काम कराने के आरोप लगते रहे हैं. सरकार ने सीबीआइ की अनुशंसा के आलोक में इस अधिकारी के खिलाफ कर्तव्यहीनता के आरोप में विभागीय कार्यवाही शुरू की है.
सीबीआइ का आरोप
सरकार के भेजे गये पत्र में सीबीआइ ने इस इंजीनियर पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. पत्र में कहा गया है कि आरआरडीए में बिल्डिंग प्लान जमा किया गया था. बिल्डर ने जिस जमीन पर नक्शा पास करने के लिए आवेदन दिया था, उस जमीन को हाउसिंग बोर्ड के लिए अधिगृहित किया जा चुका था. बोर्ड ने इस सिलसिले में आरआरडीए से बोर्ड की जमीन पर नक्शा नहीं पास करने का अनुरोध किया था. बिल्डर द्वारा बिल्डिंग प्लान जमा करने से पहले आम नागरिकों की ओर से दो शिकायती पत्र आरआरडीए को भेजा गया था. इसमें से एक पत्र जांच के लिए त्रिपाठी को दिया गया था. त्रिपाठी ने इस शिकायती पत्र की जांच नहीं की. आरआरडीए से तबादले के बाद उसे लंबित कामों का ब्योरा और उससे संबंधित पत्र आदि आरआरडीए को सौंपने का निर्देश दिया गया था, पर उसने शिकायती पत्र सहित अन्य दस्तावेज आरआरडीए को नहीं लौटाया.