माता-पिता का उपकार कभी न भूलें : सागर जी

रांची : घर वही होता है, जहां बंधुजनों से प्रेम, अतिथि का सम्मान, कुलाचार का पालन व माता-पिता की सेवा होती है. माता-पिता का उपकार हमें कभी नहीं भूलना चाहिए. एक अच्छा घर वही हो सकता है, जहां पर धर्म, अर्थ व काम पुरुषार्थ की सिद्धि हो. उक्त बातें आचार्य शीतल सागर जी महाराज ने […]

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रांची : घर वही होता है, जहां बंधुजनों से प्रेम, अतिथि का सम्मान, कुलाचार का पालन व माता-पिता की सेवा होती है. माता-पिता का उपकार हमें कभी नहीं भूलना चाहिए. एक अच्छा घर वही हो सकता है, जहां पर धर्म, अर्थ व काम पुरुषार्थ की सिद्धि हो. उक्त बातें आचार्य शीतल सागर जी महाराज ने रविवार को जैन मंदिर परिसर में प्रवचन के दौरान कही. उन्होंने कहा कि जिस परिवार में सभी एक साथ भोजन करते हैं, वह परिवार कभी बिखर नहीं सकता है.
जो समाज एक साथ भजन करता है, वह समाज कभी टूट नहीं सकता है. धन आपके पास तभी तक श्रेष्ठ है, जब तक वह दूसरे के उपकार के लिए है.
चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन : जैन युवा जागृति समिति द्वारा जैन भवन में चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. ग्रुप ए में दिव्यम जैन , ग्रुप बी में आराध्या जैन, ग्रुप सी में एच जैन व ग्रुप डी में कालिका बड़जात्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया.
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