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आंदोलन की आड़ में ठेका दिलाने का खेल : गिलुवा

रांची: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि झारखंड में जमीन अधिग्रहण बड़ी समस्या है. हाल में हो रही घटनाओं से यह प्रदर्शित हो रहा है. उन्होंने कहा कि गत दिनों बड़कागांव में हुई घटना के पीछे कांग्रेस नेता सह पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का हाथ है. वह आर्थिक स्रोत पर कब्जा करने की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 7, 2016 1:18 AM
रांची: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि झारखंड में जमीन अधिग्रहण बड़ी समस्या है. हाल में हो रही घटनाओं से यह प्रदर्शित हो रहा है. उन्होंने कहा कि गत दिनों बड़कागांव में हुई घटना के पीछे कांग्रेस नेता सह पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का हाथ है. वह आर्थिक स्रोत पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं.

विस्थापितों के आंदोलन की आड़ में उन्होंने अपने परिवार व बेटे को ठेका दिलाने का प्रयास किया है. श्री साव बड़कागांव की भोलीभाली जनता को बरगला रहे हैं. श्री गिलुवा गुरुवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि बड़कागांव की घटना दर्दनाक है. पार्टी मृतक व घायलों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करती है.
फायरिंग के सवाल पर घिरे गिलुवा : बड़कागांव में ग्रामीणों पर की फायरिंग पर पूछे गये सवाल पर श्री गिलुवा स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दे पाये. पत्रकार यह जानना चाह रहे थे कि बार-बार निर्दोष ग्रामीणों पर क्यों फायरिंग की जा रही है. यह पूछे जाने पर कि जमीन अधिग्रहण बड़ी समस्या है, तो निवेशकों को कैसे जमीन दी जायेगी? इस पर श्री गिलुवा ने कहा कि इसको लेकर सरकार की ओर से प्रयास जारी है.
रैयतों को प्रति एकड़ 20 लाख मुआवजा व नौकरी
श्री गिलुवा ने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से बड़कागांव के रैयतों की भावना के साथ खड़ी है. सरकार ने घटना की जांच को लेकर उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है. जांच में सब कुछ साफ हो जायेगा. बड़कागांव के विस्थापितों को लेकर 16 जुलाई को रैयतों व सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी. इसमें एनटीपीसी ने रैयतों को प्रति एकड़ 20 लाख रुपये मुआवजा और नौकरी देने पर सहमति जतायी थी. सरकार विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर भी प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि बड़कागांव में वर्ष 2013 में काम शुरू हुआ था. उस वक्त यूपीए की सरकार थी. तब से जमीन के मामले को लटका कर रखा गया. जनता को स्वार्थी राजनीतिज्ञों व विपक्षी दलों के चाल चरित्र को पहचान कर सचेत रहने की आवश्यकता है.

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