सीसीएल में मैनपावर घटा, पर उत्पादन बढ़ा

रांची : एक नवंबर 1975 को सभी निजी कोयला कंपनियों को एक कर उसका राष्ट्रीयकरण किया गया था. इसी दिन कोल इंडिया की कई अनुषंगी कंपनियों का गठन हुआ. इसमें सीसीएल भी है. सीसीएल भी एक नवंबर को स्थापना दिवस मना रहा है. कंपनी के मुख्यालय सहित सभी एरिया में समारोह का आयोजन होगा. कोल […]

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रांची : एक नवंबर 1975 को सभी निजी कोयला कंपनियों को एक कर उसका राष्ट्रीयकरण किया गया था. इसी दिन कोल इंडिया की कई अनुषंगी कंपनियों का गठन हुआ. इसमें सीसीएल भी है. सीसीएल भी एक नवंबर को स्थापना दिवस मना रहा है. कंपनी के मुख्यालय सहित सभी एरिया में समारोह का आयोजन होगा. कोल इंडिया का मुख्य समारोह कोलकाता में होगा.

पिछले 40 साल में सीसीएल के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई. गठन के कुछ वर्षों तक मैन पावर लगातार बढ़ता रहा, लेकिन पिछले 10 साल से मैन पावर लगातार घट रह रहा है. यहां भी निजी कंपनियों से खनन, ट्रांसपोर्टेशन व ओबी हटाने का काम हो रहा है. उत्पादन बढ़ाने और ओबी हटाने में नयी-नयी तकनीकी का इस्तेमाल भी हो रहा है. इस कारण कंपनी से सीधे जुड़े कर्मियों की संख्या में पिछले 10 साल में करीब 18 हजार कमी आयी है. वहीं उत्पादन करीब 20 मिलियन टन बढ़ा है. ओवर बर्डन तो 45.90 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़ कर 106.78 मिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है.
अंडर ग्राउंड से उत्पादन घटा : नयी-नयी तकनीकी के कारण कंपनी ओपेन कास्ट से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर रही है. 2007 में दो मिलियन टन कोयले का उत्पादन अंडर ग्राउंड माइंस से होता था, इसकी तुलना में अब एक मिलियन टन से भी कम उत्पादन होने लगा है. वहीं ओपेन कास्ट से उत्पादन करीब-करीब दोगुना हो गया है. 2007 में पूरे साल में करीब 39.36 मिलियन टन कोयले का उत्पादन ओपेन कास्ट से सीसीएल कर रहा था, जो बढ़ कर करीब 60 मिलियन टन हो गया है.
265 से बढ़ कर तीन हजार करोड़ पहुंचा लाभ : सीसीएल का लाभ पिछले 10 साल में 265 करोड़ से बढ़ कर तीन हजार करोड़ पहुंच गया है. 2012 में कंपनी की कमाई 1484 करोड़ रुपये थी, जो 2014 में बढ़ कर 1973 करोड़ हो गयी थी. 2015 में यह बढ़ कर तीन हजार करोड़ के पार हो गयी थी.
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