जेपीएससी: 34 वर्ष बाद राज्य के विवि में शुरू हुई रीडर आैर प्रोफेसर की नियुक्ति

रांची: राज्य के पांच विवि रांची विवि, विनोबा भावे विवि, सिदो-कान्हू मुरमू विवि, कोल्हान विवि व नीलांबर-पीतांबर विवि में 34 साल बाद रीडर व प्रोफेसर की सीधी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी है. वहीं 22 साल बाद कॉलेज प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी है. विवि में रीडर व प्रोफेसर की सीधी नियुक्ति 1982 […]

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रांची: राज्य के पांच विवि रांची विवि, विनोबा भावे विवि, सिदो-कान्हू मुरमू विवि, कोल्हान विवि व नीलांबर-पीतांबर विवि में 34 साल बाद रीडर व प्रोफेसर की सीधी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी है. वहीं 22 साल बाद कॉलेज प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी है. विवि में रीडर व प्रोफेसर की सीधी नियुक्ति 1982 के बाद नहीं हुई है.
वहीं कॉलेज प्राचार्य की सीधी नियुक्ति 1994 के बाद से अब तक नहीं हुई है. झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ कर दी है. रीडर/प्रोफेसर व प्राचार्य के रिक्त पदों में रेगुलर व बैकलॉग भी है. अब तक मिली जानकारी के अनुसार रेगुलर व बैकलॉग मिला कर रीडर के 165 पद, प्रोफेसर के 155 पद व प्राचार्य के 44 रिक्त पदों पर नियुक्ति की जानी है. रांची विवि में रीडर के 39, प्रोफेसर के 94 व प्राचार्य के 10 पद रिक्त हैं. इसी प्रकार विनोबा भावे विवि में रीडर के छह पद, प्रोफेसर के छह व प्राचार्य के 15 रिक्त पद हैं.

सिदो-कान्हू मुरमू विवि में रीडर के 34, प्रोफेसर के 12 व प्राचार्य के चार रिक्त पद हैं. कोल्हान विवि में रीडर के 44, प्रोफेसर के 22 व प्राचार्य के 11 पद रिक्त हैं. नीलांबर-पीतांबर विवि में रीडर के 42, प्रोफेसर के 21 व प्राचार्य के चार पद रिक्त हैं. शिक्षकों की कमी से जहां पठन-पाठन प्रभावित है. वहीं प्राचार्य की कमी के कारण अंगीभूत कॉलेजों में प्रोफेसर इंचार्ज से काम चलाया जा रहा है. जेपीएससी द्वारा आवेदन पत्र सहित रिक्तियों का ब्यौरा व गाईडलाइन 30 नवंबर 2016 को वेबसाइट पर अपलोड करेगा. भरे हुए आवेदन पत्र निबंधित डाक/स्पीड पोस्ट या हाथों-हाथ 20 दिसंबर 2016 तक जमा होंगे. उम्मीदवार को आयोग की वेबसाइट से ही आवेदन पत्र व चालान डाउनलोड कर भरना है.

व्याख्याता नियुक्ति में लगेगा समय
राज्य के विश्वविद्यालयों में व्याख्याता नियुक्ति में अभी अौर भी समय लगने की संभावना है. कई विवि द्वारा रोस्टर क्लियर नहीं हो सका है. वहीं नये नियम के अनुसार झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) का भी आयोजन करना है. राज्य में अब तक एक ही बार जेट का आयोजन हुआ है. उसकी भी सीबीआइ से जांच चल रही है. जेट के लिए यूजीसी से स्वीकृति लेना आवश्यक है. वहीं नये नियम के अनुसार व्याख्याता नियुक्ति में पीएचडी योग्यता धारी को शामिल नहीं किया जा रहा है. जिसका झारखंड में विरोध किया जा रहा है. व्याख्याता नियुक्ति में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) व झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) से उत्तीर्ण उम्मीदवार ही शामिल हो सकते हैं. फलस्वरूप व्याख्याता नियुक्ति मामले में पेंच फंसा हुआ है. राज्य में 2007 के बाद से व्याख्याता का नियुक्ति नहीं हो सकी है.
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