आठ महीने से शहर में नहीं लगी एक भी स्ट्रीट लाइट
रांची: सरकार के 05 अप्रैल 2016 को रांची नगर निगम के लाइट खरीदने पर रोक लगा दिया था. इस आदेश को आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन रांची नगर निगम ने राजधानी के गली-मोहल्लों और प्रमुख सड़कों पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगायी है. निगम की दलील है की सरकार ने उसके हाथ बांध […]
रांची: सरकार के 05 अप्रैल 2016 को रांची नगर निगम के लाइट खरीदने पर रोक लगा दिया था. इस आदेश को आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन रांची नगर निगम ने राजधानी के गली-मोहल्लों और प्रमुख सड़कों पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगायी है. निगम की दलील है की सरकार ने उसके हाथ बांध रखे हैं. इधर, सरकार ने अपनी ओर से भी शहर में कहीं भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगायी है. इसका खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है. हालत यह है कि शहर के कई हिस्से शाम होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं.
हालांकि, राज्य सरकार ने हर नगर निकाय में स्ट्रीट लाइट लगाने का काम इइएसएल कंपनी को सौंपा है. इसके लिए कंपनी को सर्वे करना था कि राज्य के विभिन्न शहरों में बिना लाइटवाले बिजली के कितने खंभे हैं, लेकिन यह सर्वे भी आत तक नहीं हुआ. ऐसे में आशंका जतायी जा रही है कि नयी लाइटाें के लगने में और कम से कम चार से छह माह का समय और लग जायेगा.
ये क्षेत्र हैं अधिक प्रभावित
लाइट की खरीद पर रोक लगाये जाने का सबसे अधिक असर राजधानी के बाहरी इलाकों पर पड़ा है, जहां नयी कॉलोनियां बस रही हैं. इनमें पुंदाग क्षेत्र सहित बजरा के अासपास के मोहल्ले शामिल हैं. वहीं हिनू, एयरपोर्ट के आसपास के मोहल्ले, हरमू्, अरगोड़ा सहित कई मोहल्ले भी है, जहां स्ट्रीट लाइट नहीं लगी हैं.
राज्य सरकार के आदेश से निगम के हाथ बंधे हुए हैं. पार्षदों से कई मोहल्लों में लाइट लगाने की मांग की जा रही है. हमारी सरकार से मांग है कि सभी पार्षदों के पास नागरिक सुविधा का फंड है. सरकार हमें उस राशि से लाइट खरीदने की अनुमति दे.
संजीव विजयवर्गीय, डिप्टी मेयर
