जवानी जेल में गुजर गेलक, केकरा दोष दियो : किनू मुंडा

सतीश कुमार/केदार महतो बेड़ो के किनू मुंडा को निर्दोष साबित होने में 18 साल लग गये. किनू मुंडा की पूरी जवानी जेल में ही गुजर गयी. न्याय के चक्कर में उसका परिवार बिखर गया. जेल जाने के तीन साल बाद किनू मुंडा की मां बिजाइन मुंडाइन और भाभी गुजाइन मुंडाइन की मौत हो गयी. इसकी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 2, 2016 3:10 AM
सतीश कुमार/केदार महतो
बेड़ो के किनू मुंडा को निर्दोष साबित होने में 18 साल लग गये. किनू मुंडा की पूरी जवानी जेल में ही गुजर गयी. न्याय के चक्कर में उसका परिवार बिखर गया. जेल जाने के तीन साल बाद किनू मुंडा की मां बिजाइन मुंडाइन और भाभी गुजाइन मुंडाइन की मौत हो गयी. इसकी सूचना भी किनू मुंडा को नहीं दी गयी, वे इनके अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाये.

किनू मुंडा बीते दिनों की बात करते हुए बताते हैं कि जवानी जेल में गुजर गेलक, केकरा दोष दिओ. प्रभात खबर ने किनू मुंडा के गांव नेहालू के लठिया टोली में जाकर उनके परिवार से विस्तार से बातचीत की. किनू ने बताया कि उनके जेल जाते ही उनकी पत्नी दुग्गी मुंडाइन आर्थिक तंगी से घिर गयीं. मजबूर होकर वे अपने दो छोटे-छोटे बच्चों बुधवा मुंडा (तीन साल) व गावा मुंडा (डेढ़ साल) के पालन पोषण को लेकर ईंट भट्टा में मजदूरी के लिए घर से निकल गयीं. जिस वक्त किनू मुंड़ा जेल गये थे, उस वक्त उनकी पत्नी के पेट में तीन माह का बच्चा पल रहा था. जेल जाने के बाद किनू मुंडा के सबसे छोटे बेटे बांधा मुंडा का जन्म हुआ. जेल में रहने के दौरान उनकी पत्नी एक बार उनसे मिलने जेल गयी थी. उस वक्त उनका सबसे छोटा बेटा डेढ़ साल का था. इसके बाद किनू मुंडा को अपने परिवार के लोगों से मुलाकात नहीं हो पायी.

आर्थिक तंगी की वजह से नहीं रख पाये वकील : आर्थिक तंगी की वजह से किनू मुंडा अपनी वकालत के लिए वकील भी नहीं रख पाये. एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर फास्ट ट्रैक कोर्ट-4 ने 21 सितंबर 2004 को चचेरे भाई की हत्या के आरोप में किनू मुंडा को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जेल अपील फाइल की गयी. किनू मुंडा का पक्ष और कोर्ट को सहयोग करने के लिए हाइकोर्ट ने अधिवक्ता सौरभ शेखर को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया. किनू मुंडा की अपील पर सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रदीप कुमार मोहंती व जस्टिस आनंदा सेन की खंडपीठ ने 17 नवंबर को अपना फैसला सुनाया. हाइकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद किनू मुंडा को निर्दोष करार देते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही निचली अदालत की ओर से सुनाये गये आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया. हाइकोर्ट आदेश के बाद किनू मुंडा जेल रिहा होकर 18 नवंबर को अपने गांव पहुंचे.
शराब की वजह से भाई गुजर गेलक… : किनू मुंडा की उम्र अभी लगभग 45 साल है. जिस वक्त घटना हुई थी उस वक्त उनकी उम्र 27-28 साल रही होगी. वे बताते हैं कि सरहुल के दिन घटना घटी थी. उनका चचेरा भाई शराब के नशे में था. शराब पीने के बाद वह लोगों के साथ झगड़ा कर रहा था. मारपीट के दौरान उनकी मौत हो गयी. मेरे घर के समीप झगड़ा हो रहा था. मैं वहां मौजूद था. बाद में मुझे पुलिस पकड़ कर ले गयी. तब से मैं जेल में बंद था. शराब पीने के कारण हमर भाई गुजर गेलक. हम ऊ दिन याद नहीं करल चाहत हीं. अब बचल जिंदगी परिवार साथ कट जाये, इहे कामना कर थी.
घर वालों को नहीं पता था रिहा हो गये किनू : किनू मुंडा के पत्नी और बच्चों को हाइकोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं थी. जेल से रिहा होने के बाद किनू मुंडा 18 दिसंबर को घर पहुंचे. उनके छोटे बच्चा भी उन्हें पहचान नहीं सका. किनू मुंडा ने बताया कि 18 साल के बाद गांव लौटे तो काफी कुछ बदल गया था. दूसरा बेटा से अभी तक उनकी मुलाकात नहीं हुई है. वह मजदूरी करने के लिए बाहर गया हुआ है.
केस का फैक्ट फाइल
घटना की तिथि : 19 मार्च 1998 को हुई किनू मुंडा के चचेरे भाई भेंगा मुंडा की हत्या
आरोप : किनू मुंडा ने अपने चचेरे भाई की चाकू मार कर हत्या कर दी.
निचली अदालत का फैसला : 21 सितंबर 2004 को एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर ने किनू मुंडा को आजीवन कारावास की सजा सुनायी.
हाइकोर्ट का फैसला : 17 नवंबर को हाइकोर्ट ने किनू मुंडा को निर्दोष करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया.
साक्ष्य के अभाव में निर्दोष करार हुए किनू मुंडा
हाइकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद साक्ष्य के अभाव में किनू मुंडा को निर्दोष करार दिया. इस मामले में छह लोगों की गवाही हुई थी. इसमें दो गवाह मुकर गये. घटना का कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था. सूचनाकर्ता मृतक की पत्नी भी घटना के दौरान मौजूद नहीं थी. ट्रायल के दौरान इनका क्रास एग्जामिनेशन भी नहीं हो पाया था. किनू मुंडा व उसके चचेरे भाई में कोई व्यक्तिगत दुश्मनी भी नहीं थी.