रांची के दोनों फ्लाई ओवरों का टेंडर रद्द

रांची: रांची के प्रस्तावित दोनों फ्लाई ओवर का टेंडर रद्द कर दिया गया है. नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने टेंडर रद्द कर नये सिरे से टेंडर करने का आदेश जुडको को दिया है. प्रस्तावित फ्लाई ओवर राजभवन से हरमू पुल और कांटाटोली चौक पर बनना है. यह दूसरा मौका है […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 9, 2016 1:24 AM
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रांची: रांची के प्रस्तावित दोनों फ्लाई ओवर का टेंडर रद्द कर दिया गया है. नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने टेंडर रद्द कर नये सिरे से टेंडर करने का आदेश जुडको को दिया है. प्रस्तावित फ्लाई ओवर राजभवन से हरमू पुल और कांटाटोली चौक पर बनना है.

यह दूसरा मौका है जब फ्लाई ओवर का टेंडर रद्द किया गया है. वजह है कि दूसरी बार निकाली गयी निविदा में एक भी कंपनी ने निविदा नहीं डाली थी. सूत्रों ने बताया कि फ्लाई ओवर की दर में संशोधन कर नये सिरे से निविदा जारी की जायेगी. पहली बार निकाली गयी निविदा में भी दर को लेकर विवाद था. दूसरी बार निकाली गयी निविदा में भी कंपनियों ने कम दर की शिकायत की थी.
यह है मामला
रांची के रातू रोड चौक से हरमू पुल तक व कांटाटोली में बननेवाले दो फ्लाई ओवर के लिए पहली निविदा में तीन ही कंपनियों ने निविदा डाली थी. इसमें एल-1 कंपनी जेएमसी घोषित की गयी. पर मामला तब फंसा जब कंपनी ने शिड्यूल्ड रेट से 49 प्रतिशत अधिक दर दिया था. निविदा का कुल इस्टीमेट 157.69 करोड़ का था. जबकि एल-1 कंपनी जेएमसी प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड ने 236.21 करोड़ रुपये का रेट कोट किया था. जो इस्टीमेटेड कॉस्ट से 49.8 प्रतिशत अधिक था. अन्य कंपनियां सिंगला व नागार्जुना का दर इससे भी अधिक था. अंतत: विभाग ने इस टेंडर को रद्द कर दिया. इसके बाद दोबारा 30 अक्तूबर को टेंडर निकाला गया. इस बार दोनों फ्लाई ओवर के लिए अलग-अलग निविदा निकाली गयी. जिसमें हरमू फ्लाई ओवर निर्माण के लिए प्राक्कलित राशि 121 करोड़ रुपये रखी गयी थी. शेष कांटाटोली फ्लाई ओवर के लिए 40 करोड़ रुपये की प्राक्कलित राशि तय की गयी थी. पर इसमें भी कंपनियां नहीं आयी.
भूमि अधिग्रहण को लेकर भी है आशंका
सूत्रों ने बताया कि दोनों फ्लाई ओवर के लिए भूमि अधिग्रहण होगा. कंपनियों ने प्री बिड मीटिंग में ही पूछा था कि भूमि अधिग्रहण कैसे होगा. तब कहा गया था कि जिला प्रशासन भूमि अधिग्रहण करके देगा. पर कंपनियां संतुष्ट नहीं थीं. कुछ कंपनियों का कहना था कि टेंडर ले लेने के बाद ऐसा न हो कि भूमि अधिग्रहण को लेकर मामला फंस जाये. इधर, विभाग द्वारा जिला प्रशासन को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आरंभ करने का निर्देश दिया गया है.

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