राजेंद्र मुंडा ने प्राथमिकी में लिखा है कि उनके घर के समीप उनकी जमीन पर उक्त लोग जबरन धर्मांतरण कार्यक्रम कराना चाहते थे. वह अपनी जमीन पर ऐसा करने से आरोपी को रोक रहे थे. इस कारण पहले उन्हें धमकाया गया. नहीं मानने पर धारदार हथियार एवं पिस्टल से जान से मारने का प्रयास किया गया. सब इंस्पेक्टर सुखराम उरांव के मौके पर पहुंच जाने से आनन-फानन में हमलावरों ने हथियार छिपा लिया.
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे लोग वहां फेस्टिवल को लेकर गैदरिंग करना चाहते हैं. वहीं, राजेंद्र मुंडा ने कहा कि पूर्व से दूसरी जगह पर गैदरिंग होती रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेमनगर में महज 10 फीसदी ही सरना आदिवासी हैं. इन लोगों को धर्मांतरित कराने का प्रयास किया जाता रहा है.
राजेंद्र मुंडा द्वारा इसका विरोध करने के कारण उन्हें रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा गया है. उन्होंने इस मामले की जानकारी केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की को भी लिख कर दी है. फूलचंद तिर्की ने जिला प्रशासन से राजेंद्र मुंडा को पर्याप्त सुरक्षा देने व आरोपियों पर जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की मांग की है. जबरन धर्मांतरण कार्यक्रम चलाने एवं सरना आदिवासियों की जमीन पर कब्जा जमाने का प्रयास करनेवाले को ऐसा करने से बाज आने की चेतावनी दी है.