गृह निर्माण समिति की जमीन बेचने का आरोप
प्रबुद्ध नगर सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड सिमलिया निबंधक सहकारिता के यहां हुई अपील रांची : प्रबुद्ध नगर सहकारी निर्माण समिति लिमिटेड सिमलिया, गुटवा रांची के सदस्यों ने इसके सचिव राजेंद्र पांडेय पर समिति की जमीन में घोटाले का आरोप लगाया है. सचिव पर अारोप है कि वह समिति के असली सदस्यों को बाहर कर […]
प्रबुद्ध नगर सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड सिमलिया
निबंधक सहकारिता के यहां हुई अपील
रांची : प्रबुद्ध नगर सहकारी निर्माण समिति लिमिटेड सिमलिया, गुटवा रांची के सदस्यों ने इसके सचिव राजेंद्र पांडेय पर समिति की जमीन में घोटाले का आरोप लगाया है. सचिव पर अारोप है कि वह समिति के असली सदस्यों को बाहर कर नये लोगों को सदस्य बना कर उन्हें जमीन बेच रहे हैं. इधर, नये सदस्यों को अब तक जमीन नहीं मिल सकी है. इनमें से कई लोग सेवानिवृत्त होकर किराये के मकान में रह रहे हैं. कई की मौत हो चुकी है. अब समिति के सदस्यों ने निबंधक, सहकारिता के यहां सचिव राजेंद्र पांडेय के खिलाफ अपील (सं-28/2016) की है.
सदस्यों के अनुसार समिति का गठन 30 जनवरी 1984 को हुआ था. समिति के कुल 210 सदस्य थे, जिनके नाम पर 1984 से 1989 के बीच साढ़े सात-साढ़े सात डिसमिल जमीन रजिस्ट्री की गयी. पर श्री पांडेय ने किसी न किसी बहाने से सदस्यों को प्लॉट पर कब्जा देने से रोके रखा.
सदस्यों के अनुसार सचिव गुंडों के बल पर उन्हें धमकाते रहते हैं. अब उनका कहना है कि जमीन किसी को नहीं मिलेगी. इस पर फ्लैट बनाकर सबको दिया जायेगा. जमीन पर अवैध आवंटन रोकने के लिए सदस्यों ने एसडीअो के यहां शिकायत कर धारा 144 लगवायी. राजेंद्र पांडेय पर यह भी आरोप है कि वह समिति से जुड़े खर्च व अन्य मामलों की जानकारी सदस्यों को नहीं देते हैं.
पशुपालन मामले में दोषी : समिति के सचिव राजेंद्र पांडेय पशुपालन घोटाले के दोषी हैं. उन्हें घोटाले से संबंधित केस (आरसी53ए/1996) में पांच वर्ष तथा एक दूसरे केस (आरसी35ए/96पीएटी) में दो वर्ष की सजा भी हुई है.
मैंने किसी के साथ अन्याय नहीं किया है. पहले बिहार सरकार व बाद में झारखंड के एक राजनेता के खिलाफ लड़ कर मैंने समिति की जमीन बचायी है. जमीन रजिस्ट्री होने के बाद लंबे समय तक इस पर किसी सदस्य ने दखल नहीं लिया. अब मुझ पर आरोप लगाया जा रहा है.
राजेंद्र पांडेय, समिति के सचिव