रांची : दुकानें बंद, बेरोजगारी बढ़ी, मटन-चिकन महंगे

सरकार का फरमान. मीट-मुर्गा बेचने और खानेवाले दोनों परेशान, अब तक शुरू नहीं हुआ निगम का स्लाॅटर हाउस रांची : राज्य सरकार के फरमान के बाद राजधानी की 2500 से ही अधिक मीट-मुर्गे की दुकानों पर ताला लटका हुआ है. पिछले 18 दिनों से शहर में मीट-मुर्गा बेचने वाले दुकानदार बेरोजगारी की हालत में हैं. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
सरकार का फरमान. मीट-मुर्गा बेचने और खानेवाले दोनों परेशान, अब तक शुरू नहीं हुआ निगम का स्लाॅटर हाउस
रांची : राज्य सरकार के फरमान के बाद राजधानी की 2500 से ही अधिक मीट-मुर्गे की दुकानों पर ताला लटका हुआ है. पिछले 18 दिनों से शहर में मीट-मुर्गा बेचने वाले दुकानदार बेरोजगारी की हालत में हैं. इधर, मीट-मुर्गा खाने के शौकीन लोगों को इसके लिए दोगुनी कीमत तक चुकानी पड़ रही है. कार्रवाई के डर से कुछ दुकानदार दुकानों की बजाय कहीं और खस्सी-मुर्गा काटकर बेच रहे हैं. नगर निगम द्वारा लगायी गयी रोक के कारण मटन-चिकन के दामों में भी डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी हुई है. आम दिनों में चिकन 90 से 100 रुपये किलो बिकता था.
रोक के बाद चिकन की कीमत 150-160 रुपये प्रति किलो हो गयी है. वहीं, खस्सी का मीट आम दिनों में 350 से 400 रुपये प्रति किलो बिकता था. रोक के बाद इसकी कीमत 500-600 रुपये किलो बिक रहा है. उधर, शहर के रेस्टुरेंट और होटलों में मटन-चिकन धड़ल्ले से परोसा जा रहा है. इस बाबत सवाल करने पर रांची नगर निगम की हेल्थ आॅफिसर डॉ किरण कहती हैं कि अगर होटल संचालक कहीं बाहर से मटन-चिकन मंगा कर बेच रहे हैं, तो इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है. हमें केवल शहर में खुलेआम मटन-चिकन काटने पर रोक लगवाना था.
बोर्ड देगा नियमावली को मिलेगी मंजूरी : मटन-चिकन की दुकानों को नये सिरे से लाइसेंस देने के लिए नगर निगम ने नियमावली बनायी है. इसके तहत अब कोई भी दुकानदार खुले में मटन-चिकन काट कर नहीं बेच सकता है. उसे निगम के स्लॉटर हाउस में ही अपने पशु को कटवाना होगा. फिर वहीं से लाकर वह मांस को बेचना होगा. आमलोगों को स्लॉटर हाउस आने व जाने में बहुत ज्यादा परेशानी न हो. इसके लिए निगम ने शहर में भी 10 मिनी स्लॉटर हाउस बनाने के लिए लोगों से आवेदन मांगा है. जो भी व्यक्ति अपने जमीन या भूमि पर स्लॉटर हाउस का निर्माण करना चाहता है, उसे निगम के शर्तों के अनुसार स्लॉटर हाउस खोलने की अनुमति नगर निगम देगा. निगम की स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ किरण की मानें, तो निगम बोर्ड की बैठक में स्लॉटर हाउस के लिए बनाये गये नियमावली को पास कराकर मटन-चिकन की दुकानों को लाइसेंस देने की कार्रवाई नयी नियमावली के तहत प्रारंभ कर दी जायेगी.
52 को मटन-चिकन बेचने का लाइसेंस : रांची नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान केवल 52 दुकानों को ही मटन-चिकन बेचने का लाइसेंस दिया था. इन्हें केवल व्यापार की अनुमति दी गयी थी न कि खस्सी या मुर्गा काटने की. सरकार द्वारा रोक लगाये जाने के बाद निगम ने इन दुकानों को भी नोटिस जारी किया कि वे मुर्गा या खस्सी काट नहीं सकते हैं.
अब भी 750 क्विंटल मुर्गा रोज बिक रहा है : नगर निगम के आदेश के बाद राजधानी में मटन-चिकन की दुकानें तो बंद हो गयी हैं, लेकिन मुर्गे की बिक्री में कोई कमी नहीं आयी है. थोक विक्रेताओं का मानना है कि बिक्री में कोई खासा अंतर नहीं आया है. अब भी हर दिन 750 क्विंटल के आसपास मुर्गाे की बिक्री हो रही है. हालांकि, खस्सी की बिक्री जरूर प्रभावित हुई है. पहले जहां अौसतन एक दुकानदार एक दिन में पांच से दस खस्सी बेच ले रहे थे. वहीं, अब एक भी नहीं बेच पा रहे हैं. रांची शहर में लगभग 300 से ज्यादा दुकानें हैं. फिलहाल कई लोग देहात के बाजारों से ही खस्सी खरीदकर ला रहे हैं.
झारखंड में बिना लाइसेंस के चलनेवाली सभी मीट-मुर्गे की दुकानें बंद करा दी गयी हैं. वैध रूप से ये दुकानें चलेंगी, इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. क्योंकि लाइसेंस को लेकर नगर विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच पेच फंसा हुआ है. इधर, मीट-मुर्गे की दुकानें बंद होने का सीधा असर आमलोगों पर पड़ रहा है. काफी मशक्कत के बाद लोगों को महंगे दामों पर मटन-चिकन मिल रहा है. यानी जाहिर है कि इनकी कालाबाजारी शुरू हो गयी है. वहीं, दुकानें बंद होने से सैंकड़ों लोग बेरोजगार हो गये हैं. उधर, दावा किया जा रहा था कि रांची नगर निगम का स्लॉटर हाउस 15 अप्रैल तक शुरू हो जायेगा, लेकिन अब तक वह भी शुरू नहीं हो सका है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार ने मटन-चिकन की दुकानें बंद कराने का फैसला बिना किसी तैयारी के ही ले लिया है.
अधूरी तैयारी : 17 माह से जारी नहीं हुआ लाइसेंस
रांची : मीट-मुर्गे की दुकानों को लाइसेंस देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 29 नवंबर 2015 को ही एक अधिसूचना जारी कर सभी जिलों में एसीएमओ को अधिकृत कर दिया है. दूसरी ओर नगर विकास विभाग द्वारा ‘झारखंड नगर पालिका अधिनियम-2011’ के तहत मांस दुकानों का लाइसेंस निकायों द्वारा निर्गत किया जाना है. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम रजिस्ट्रेशन कर एनओसी देगा. फिर एसीएमओ लाइसेंस देंगे. खास बात यह है कि पूरे राज्य में अब तक किसी एसीएमओ ने किसी भी मांस विक्रेता को लाइसेंस जारी नहीं किया है.
अब तक थी यह व्यवस्था : अबतक मांस, मछली और मुर्गा दुकानों को नगर निगम द्वारा ही लाइसेंस दिया जा रहा था. पर यह भी तीन वर्ष पहले तक दिया गया. इसके बाद से न तो लाइसेंस का नवीकरण किया गया और न ही नये लाइसेंस दिये गये. बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2015 में जारी अधिसूचना के बाद ऐसी व्यवस्था की गयी थी कि एसीएमओ के यहां से लाइसेंस लेना है, लेकिन एसीएमओ के पास अबतक कोई लाइसेंस के लिए आया ही नहीं है.
एसीएमओ को ही अधिकृत किया गया है : स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के एसीएमओ को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जिलों में वैध रूप से ही मांस, मछली और मुर्गा wकी दुकानें चलें. गौरतलब है कि 29 सितंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन अॉफ क्रूएलिटी टू एनिमल(स्लॉटर हाउस) रूल्स-2001 का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है.
इस बाबत सभी राज्यों सरकारों से की गयी कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी गयी है. झारखंड से भी रिपोर्ट मांगी गयी है. एसीएमओ के कहा गया है कि जिलों में चल रहे स्लॉटर हाउस का निबंधन और लाइसेंस जरूरी है. इन्हें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडराइजेशन अथॉरिटी अॉफ इंडिया(एफएसएसएआइ) का लाइसेंस लेना है.
जो अनुपालन सुनिश्चित किया जाना है : सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अालोक में सभी एसीएमओ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है तमाम स्लॉटर हाउस के पास लाइसेंस हो. यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास एफएसएसआइ का लाइसेंस भी है. स्लॉटर हाउस में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जानवरों को बेहोश करने के बाद ही काटा जाय, काटने के समय सामने में दूसरा कोई जिंदा जानवर नहीं होना चाहिए. जानवरों को ले जाने वाले वाहनों में जानवारों की उचित देखभाल भी सुनिश्चित की जानी है. सड़क के किनारे दुकान न हो यह भी सुनिश्चित किया जाना है. इसके अलावे भी कई अन्य दिशा-निर्देश भी दिये गये हैं, जिसका अनुपालन जिलों को करना है.
स्वास्थ्य विभाग ने 29 नवंबर 2015 को ही जारी की थी अधिसूचना
लाइसेंस को लेकर नगर विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच पेच फंसा
नये प्रावधान के तहत सिविल सर्जन कार्यालय के एसीएमओ को देना है लाइसेंस
नगर निगम को रजिस्ट्रेशन कर जारी करना है नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी)
इन लोगों को मिल सकता है लाइसेंस
जिनके यहां कम से कम दो बड़े जानवर(भैंसा) प्रतिदिन कटता हो, 10 छोटे जानवर बकरा, भेड़ या सूअर या 50 पोल्ट्री बर्ड(चिकन ) प्रतिदिन बेचे या काटे जाते हैं. उन्हें पंचायत अथवा शहरी निकायों से रजिस्ट्रेशन कराना होगा.
जिनके यहां 50 बड़े जानवर या 150 छोटे जानवर या एक हजार पोल्ट्री बर्ड हो, उन्हें सेंट्रल लाइसेसिंग अथॉरिटी एफएसएसएआइ से लाइसेंस लेना होगा. शेष को जिला के सिविल सर्जन कार्यालय के एसीएमओ से लाइसेंस लेना होगा.
जो केवल इनकी बिक्री करना चाहते हैं, पर काटने का काम नहीं करते उन्हें प्रज्ञा केंद्र में अॉनलाइन आवेदन देकर निबंधन कराना होगा. हालांकि, निबंधन वही करा सकते हैं, जिनकी सालाना आय 12 लाख रुपये से कम हो. जिनकी आय 12 लाख रुपये सालाना से अधिक है, उन्हें एसीएमओ के यहां आवेदन देकर लाइसेंस लेना होगा तभी वे चिकन या बकरा बेच सकते हैं.
एनओसी के इंतजार में कांके का स्लॉटर हाउस
राज्य का पहला स्लॉटर हाउस कांके में बन कर तैयार हो गया है. साढ़े छह एकड़ में फैली इस मॉडर्न वधशाला में अत्याधुनिक मशीनें लग चुकी हैं. दुकानदार और आमलोग यहां अपने खस्सी व भेड़ को कटवा सकते हैं. पशु को काटने के बाद उसे मीट को संबंधित व्यक्ति को पैक कर उपलब्ध करा दिया जायेगा. शहर के दुकानदार भी यहीं से मीट लाकर दुकानों में बेच सकते हैं. इस वधशाला में प्रतिदिन 500 खस्सी अौर 500 भेड़ काटे जायेंगे. पशुओं की कटाई से लेकर उसके शरीर से निकले अवशेष का निस्तारण सब कुछ यहां मशीन से ही होगा. इसके लिए प्लांट भी लगाया जा चुका है. रांची नगर निगम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इस स्लॉटर हाउस को शुरू करने के लिए एनओसी मांगा है, जो अब तक नहीं मिला है. साथ ही बिजली विभाग को वधशाला में विद्युत कनेक्शन देने और स्वास्थ्य विभाग से वेटेनरी डॉक्टर प्रतिनियुक्त करने की मांग की गयी है. उधर, वधशाला विरोधी संघर्ष समिति ने राज्य सरकार से कांके में बन रही रांची नगर निगम की वधशाला को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है. समिति के पदाधिकारियों ने कहा है कि इस वधशाला का निर्माण जुमार नदी से मात्र 190 मीटर दूर पर किया जा रहा है. कांके की जनता इसका भारी विरोध कर रही है.
मटन-चिकन की दुकानों के संचालन के लिए नगर निगम द्वारा नियमावली बनायी गयी है. निगम बोर्ड से इस नियमावली को मंजूर मिलने के बाद अगले 15 दिनाें में दुकानों को नये सिरे से लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी. जो भी दुकानदार नियमावली का पालन करेंगे, उन्हें लाइसेंस दिया जायेगा.
डॉ किरण, हेल्थ आॅफिसर, रांची नगर निगम
हमारी स्थिति काफी खराब है. हम लाइसेंस मिलने के इंतजार में बैठे हैं. घर का काम काज ठप हो गया है. बिक्री बंद होने से अौसतन हर दिन दस हजार लोगों की रोजीरोटी प्रभावित हो रही है. सरकार से हमारी मांग की है कि जल्द से जल्द इसकी बिक्री शुरू करायी जाये.
मोईन, खस्सी विक्रेता
नगर पालिका अधिनियम-2011 के पालन का निर्देश
नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने 31 मार्च 2017 को राज्य के सभी नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर झारखंड नगर पालिका अधिनियम-2011 के प्रावधानों के अंतर्गत मांस दुकानों को लाइसेंस निर्गत करने का निर्देश दिया है.
अधिनियम की धारा 155, 310 एवं 322 के अनुसार मांस, मछली या कुक्कुट जैसे कार्य-कलाप के लिए लाइसेंस लेना होगा. पशुओं के खरीद-बिक्री के लिए लाइसेंस लेना होगा.
अधिनियम की धारा 310 में बिक्री के लिए पशुओं के वधन करने के स्थान के बाबत लिखा गया है कि नगर पालिका, स्वयं या राज्य सरकार द्वारा अपेक्षा किये जाने पर नगरपालिका सीमा के भीतर स्थान नियत करेगी और बिक्री के लिए पशुओं के वधन के लिए ऐसे स्थानों के उपयोग के लिए लाइसेंस स्वीकृत या वापस कर सकेगी. यदि ऐसे परिसर नियत किये गये हों, तो कोई व्यक्ति किसी अन्य स्थल पर बिक्री हेतु किसी पशु का वध नहीं करेगा. यदि कोई नियत स्थान से अलग पशुओं का वध करता है तो वह दो हजार रुपये के जुर्माने के दंड का भागी होगा.
यह सही है कि एसीएमओ ही लाइसेंसिंग अथॉरिटी है. यह वर्ष 2015 से ही लागू है. पर इसके लिए मीट, मुर्गा दुकानों को पहले नगर निगम से एनओसी लेना होगा. एनओसी देने के पूर्व यह सुनिश्चित किया जायेगा कि दुकान सड़क के किनारे न हो. दुकान स्थायी जगह पर है. वहां हाइजिन का पूरा पालन किया जा रहा है. जो एफएसएसएअाइ का नॉर्म्स है, उसके अनुरूप दुकान है तभी नगर निगम एनओसी देगा. इसके बाद दुकानदार एसीएमओ के पास आवेदन देगा. फिर एसीएमओ नगर निगम के एनओसी के आधार पर लाइसेंस निर्गत करेगा.
डॉ नीलम चौधरी, एसीएमओ, रांची सिविल सर्जन कार्यालय
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडराइजेशन एक्ट के तहत लाइसेंसिंग अथॉरिटी एसीएमओ ही हैं. नगर निकाय एनओसी देंगे और एसीएमओ लाइसेंस निर्गत करेंगे. विभाग की मंशा यह है कि सभी दुकानें रेगुलाइज हों और कानून के तहत चलें. दुकानदार को अपना रजिस्ट्रेशन निगम में कराना होगा. जिसमें कहां दुकान है.
मौजा, रकमा, चौहद्दी की जानकारी देनी होगी. इसके बाद मांस काटने और बिक्री का लाइसेंस एसीएमओ द्वारा जारी की जायेगी. इसकी अधिसूचना 23.11.2015 को ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गयी है. इसी के अनुरूप विभाग काम कर रहा है.
एके रतन, संयुक्त सचिव, नगर विकास विभाग
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