लिपिक और पंचायत सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाया सवाल
रांची : झामुमो विधायक कुणाल षाडंगी ने कहा है कि झारखंड में राज्य सरकार ने स्थानीय नीति के नाम पर धोखा दिया है़ आदिवासी-मूलवासी के खिलाफ साजिश हुई है़ मूलवासियों का हक मारने के लिए सरकार ने स्थानीय नीति बनायी है़
राज्य में इंटरमीडिएट स्तर पर लिपिक और पंचायत सचिव की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जा रही है़ इसमें पूरे देश के लोगों को आवेदन करने की छूट दी गयी है़ राज्य के तृतीय व चतुर्थ वर्ग की नौकरी पर भी यहां के लोगों का हक नहीं है़
सरकार की नीति ऐसी है कि कोई विदेशी भी चाहे, तो आवेदन कर यहां सरकारी नौकरी कर सकता है. राज्य सरकार ने झारखंड की नौकरियों को भी ठेका-टेंडर की तरह ग्लोबल कर दिया है़ राज्य सरकार की नजर में अंगरेजी व हिंदी भी क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा की श्रेणी में है़ अखबारों में जो विज्ञापन निकाला गया है, उसमें इन दोनों भाषाओं को क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओें के साथ क्रम में लिखा गया है़ बाहर के लोगों को नौकरी बांटने पर सरकार अमादा है़ झामुमो इसका पूरी ताकत के साथ विरोध करेगा़ हम सरकार को लोगों का हक मारने नहीं देंगे़