नक्सली नकुल व मदन यादव को पुलिस ने सामने लाया

रांची : नयी दिशा अभियान के तहत सरेंडर करने वाले 15 लाख के इनामी नक्सली नकुल यादव व पांच लाख के इनामी नक्सली मदन यादव को गुरुवार को रांची रेंज के डीआइजी एवी होमकर ने सामने लाया. इस मौके पर एडीजी अभियान आरके मल्लिक, आइजी अभियान आशिष बत्रा व सीआरपीएफ आइजी संजय आनंद लाटेकर मौजूद […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : नयी दिशा अभियान के तहत सरेंडर करने वाले 15 लाख के इनामी नक्सली नकुल यादव व पांच लाख के इनामी नक्सली मदन यादव को गुरुवार को रांची रेंज के डीआइजी एवी होमकर ने सामने लाया. इस मौके पर एडीजी अभियान आरके मल्लिक, आइजी अभियान आशिष बत्रा व सीआरपीएफ आइजी संजय आनंद लाटेकर मौजूद थे. उक्त अधिकारियों ने नकुल यादव और मदन यादव के सरेंडर की घोषणा करते हुए नकुल यादव को 15 लाख और मदन यादव काे पांच लाख रुपये का चेक प्रदान किया.
डीआइजी एवी होमकर ने बताया कि नकुल यादव की निशानदेही पर तीन मई को लोहरदगा में जिला पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने छापेमारी अभियान चलाया था. अभियान पेशरार के केरार और बुलबुल में चलाया गया था. इस दौरान हथियारों व गोलियां का जखीरा बरामद हुआ. एलएमजी समेत कुल 13 हथियार बरामद किये गये. इसके अलावा 3347 राउंड गोली, 32 मैगजीन, सात वॉकी- टॉकी और 10 बंडल कोडेक्स वायर भी बरामद हुए. बरामद हथियार व गोली पुलिस के जवानों से लूटे गये हैं.
25 लाख का इनामी नक्सली नकुल ने किया सरेंडर , कहा -अपने बच्चों को तो जंगल में नहीं रख सकता
डीआइजी ने बताया कि पिछड़े इलाके का विकास होने और पुलिस पिकेट बनने से नक्सलियों का किला ढहने लगा है. नयी दिशा अभियान से प्रभावित होकर भाकपा माओवादी के बिहार रीजन के कमांडर नकुल यादव और जोनल कमांडर मदन यादव ने तीन मई को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा जतायी. इसके बाद दोनों को सरेंडर कराया गया. दोनों नक्सलियों को गुरुवार को लोहरदगा में दर्ज एक नक्सली केस मामले में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
अर्थहीन हिंसक आंदोलन से उब गये नक्सली : डीआइजी एवी होमकर के अनुसार, लगातार अभियान चलाये जाने से नक्सलियों के बीच भय और निराशा की स्थित उत्पन्न हुई है. कई नक्सली नेता पिछले एक साल में गिरफ्तार किये गये. कई ने सरेंडर किया और कई मुठभेड़ में मारे गये.
सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बातचीत में बताया कि नक्सली भी अर्थहीन हिंसक आंदोलन से उब गये हैं. नक्सली यह महसूस कर रहे हैं कि उनके आंदोलन का आधार ही दोषपूर्ण है. अब नक्सलियों के पास मुख्यधारा में वापस लौटने के अलावा कोई दूसरा मार्ग नहीं बचा है. एडीजी आरके मल्लिक ने कहा कि दोनों ने झारखंड सरकार पर उम्मीद करके सरेंडर किया है. आइजी सीआरपीएफ संजय आनंद लाटेकर और आइजी आशिष बत्रा ने कहा कि बाहर से नक्सली झारखंड आकर गरीबों का शोषण कर रहे हैं. अब समय आ गया कि नक्सली सरेंडर करें, नहीं तो आने वाले दिनों में मुठभेड़ में मारे जायेंगे या गिरफ्तार होकर जेल जायेंगे.
छापेमारी टीम में ये थे शामिल :
एएसपी अभियान लोहरदगा विवेक कुमार ओझा, इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह, कुडू थाना प्रभारी सुधीर प्रसाद साहू, बगड़ू थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडेय, किस्को थाना प्रभारी अनिल कुमार तिवारी, पेशरार ओपी प्रभारी जगलाल मुंडा, जमादार गंगा राम मुर्मू, नीरज कुमार मिश्र और सीआरपीएफ 158 बटालियन के आरबी फिलिप, नीरज साही और डीके राय.
1993 में संगठन में शामिल हुआ था नकुल यादव
47 वर्षीय नक्सली नकुल यादव उर्फ अर्जुन यादव उर्फ जवाहर यादव उर्फ बूढ़ा चतरा जिला के कुंदा थाना क्षेत्र स्थित जोबिया का रहने वाला है. वह घर की दयनीय स्थित, अशिक्षा और पड़ोसियों से जमीन विवाद की वजह से तत्कालीन एमसीसी कमांडर रामाशंकर यादव (औरंगाबाद) की प्रेरणा से नक्सली संगठन में शामिल हुआ था.वह करीब 24 वर्षों तक संगठन में शामिल रहा. इस दौरान सैकड़ों नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया. 1995 में वह एमसीसी का एरिया कमांडर बना.
1997 में पांकी क्षेत्र का सब जोनल कमांडर बना. 2000 में नकुल पांकी छोड़ कर लोहरदगा के पेशरार चला आया और 2002 में बाइक से जाने के दौरान खलारी से गिरफ्तार हुआ. 2006 में जमानत पर मुक्त होने के बाद वह पुन: संगठन में शामिल हो गया. उसे दोबारा सबजोनल कमांडर बनाया गया़ वह लोहरदगा, गुमला एवं उत्तरी लातेहार में संगठन को मजबूत बनाया. बाद में उसे रिजनल कमांडर बनाया गया. उसके खिलाफ लोहरदगा में 64, लातेहार में 51, गुमला में 23, पलामू में चार और रांची में दो नक्सली केस दर्ज हैं.
2009 में संगठन में शामिल हुआ था मदन
नक्सली मदन यादव उर्फ मदन गोप (36 वर्ष) गुमला जिला के विशुनपुर थाना क्षेत्र के रेहलदाग का रहने वाला है. वह 2009 में नक्सली कमांडर बुद्धेश्वर उरांव के संपर्क में आकर संगठन में शामिल हुआ था.
संगठन में शामिल होने से पूर्व उसे एक बार पुलिस मुखबिर होने के आरोप में नक्सलियों ने पीटा था. मारपीट की घटना के बाद वह कमाने के लिए दिल्ली चला गया. दिल्ली से वापस लौटने पर वह बुद्धेश्वर भगत के दस्ता में शामिल होकर संगठन के लिए काम करने लगा. करीब दो साल बाद मदन यादव को नकुल यादव ने एरिया कमांडर बनाया. उसे 2012 में सबजोनल कमांडर बनाया गया. वर्ष 2016 के बाद उसे उत्तरी लातेहार का जोनल कमांडर का पद संभालने को कहा गया था. इस दौरान उसने लोहरदगा में 23 और गुमला में 12 नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया.
बरामद हथियार व सामान
7.62 एलएमजी एक पीस
सेमी ऑटोमेटिक अमेरिकन राइफल एक पीस
एके 47 एक पीस
303 बोर की राइफल दो पीस
एसएलआर राइफल तीन पीस
इंसास राइफल तीन पीस
315 बोर की राइफल चार पीस
7.62 एलएमजी की सात मैगजीन
इंसास की 18 मैगजीन
5.56 एमएम की गोली 1310 पीस
7.62 एमएम की गोली 1040 पीस
सेमी ऑटोमेटिक की गोली 190
एके 47 की गोली 100 पीस
303 बोर की गोली 102 पीस
7.68 की गोली 230 पीस
एसएलआर की मैगजीन पांच पीस
एके 47 की मैगजीन एक पीस
303 बोर की मैगजीन एक पीस
मोटरोला की सात वॉकी- टॉकी
चार्जर चार पीस
वरदी का कपड़ा 20 थान
कोडेक्स वायर 10 बंडल
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