रांची. वन विभाग पलामू में पड़ने वाली उत्तरी कोयल और औरंगा नदी को पुनर्जीवित करेगा. इसकी योजना तैयार करायी गयी है. इसके लिए रिवाइव द रिवर मिशन शुरू किया गया है. इसके तहत तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से सभी जलग्रहण क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जायेगा. स्थानीय लोगों में अपने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करने के लिए क्षमता निर्माण किया जायेगा. जल योद्धाओं (वाटर वारियर) का एक दल तैयार कराया जायेगा. स्थानीय युवा जो जलग्रहण क्षेत्र मिशन की योजना बनायेंगे, उसे लागू कराया जायेगा. इसमें स्थानीय विद्यालयों को शामिल किया जायेगा. जल संरक्षण के लिए संरचनात्मक कार्य कराये जायेंगे.
वाटरशेड पर जोर, एजेंसी कर रही अध्ययन
इस मिशन में वाटरशेड की परियोजना पर जोर होगा. ज्यादा से ज्यादा वाटरशेड बनाकर पानी रोकने का प्रयास किया जायेगा. बरसात से पहले ज्यादा से ज्यादा काम करने की योजना है. इसके लिए वन विभाग ने हैदराबाद की कंपनी ब्लू एलेक्जेंडर का चयन किया है. टीम के सदस्य फील्ड विजिट के बाद दो माह के अंदर रिपोर्ट तैयार करेंगे. रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय लोगों की मदद से नदियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास होगा.निगरानी और मूल्यांकन भी होगा
इस योजना की निगरानी और मूल्यांकन भी होगा. जनभागीदारी के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. मिशन का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में दो प्रमुख नदियों (उत्तरी कोयल व औरंगा) के साथ-साथ 500 से अधिक छोटी नदियों और नालों को पुनर्जीवित करना है. विश्व पृथ्वी दिवस पर पलामू टाइगर रिजर्व ने पलामू क्षेत्र की सूखती नदियों और नालों को पुनर्जीवित करने का मिशन शुरू किया.
बोले अधिकारी
पानी कृषि प्रधान आदिवासी आबादी और राज्य के एकमात्र बाघ अभयारण्य के वन्यजीवों की भलाई में मौलिक भूमिका निभाता है. पिछले कुछ वर्षों में मानव प्रेरित जलवायु परिवर्तन के कारण जल व्यवस्था बिगड़ गयी है. इसका सीधा असर आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक जीवन पर पड़ा है. नदियों को पुनर्जीवित करने और पृथ्वी को फिर से जीवंत करने के मिशन में एकजुट होने का समय आ गया है, ताकि हमारे वर्तमान और भविष्य की रक्षा हो सके.प्रजेश जेना, उप निदेशक, पलामू टाइगर रिजर्वB
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