रांची़ डालटनगंज के जेम्स हेरेंज 1994 से जल, जंगल और जमीन को बचाने की मुहिम में लगे हैं. वे विभिन्न समुदायों और समूहों के साथ मिलकर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. जेम्स हर महीने ग्राम सभाओं में जाकर जंगल को बचाने, पेड़ों की अवैध कटाई रोकने और गर्मियों में आगजनी की घटनाओं से निपटने के उपायों पर बात करते हैं. उनका कहना है : जल, जंगल, जमीन हमारी धरोहर है. वे मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई लोग पर्यावरण को लेकर जागरूक हैं, लेकिन कुछ लोग अब भी इसे गंभीरता से नहीं लेते. इसलिए वह लगातार गांवों में भ्रमण कर रहे हैं, ताकि सभी को जोड़ा जा सके. अब तक वे लातेहार और गढ़वा जिले के 150 से अधिक गांवों में जाकर लोगों को प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित कर चुके हैं. गर्मी के दिनों में जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं. इसे रोकने के लिए वे लोगों को बताते हैं कि आग बुझाने में देरी न हो और कैसे समुदाय मिलकर तुरंत कदम उठा सकता है.
प्रकृति का एक नियम है
वे लोगों से कहते हैं : प्रकृति का एक नियम है : जितनी जरूरत है, उतना ही लें. उनका उद्देश्य है कि हर गांव, हर व्यक्ति प्रकृति से जुड़कर जंगलों की रक्षा को अपना कर्तव्य समझे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

