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बारिश में मौत को दावत देते हैं सड़क के गड‍्ढे, गलियों में नाले

यहां एक साल पहले ही एक नाले मेें गिर कर मासूम पलक ने दम तोड़ दिया था. बच्ची खुले नाले में गिरी और पानी की तेज धार में बहते हुए छह किलोमीटर दूर स्वर्णरेखा नदी में पहुंच गयी.

नाला रोड : यहां एक साल पहले ही एक नाले मेें गिर कर मासूम पलक ने दम तोड़ दिया था. बच्ची खुले नाले में गिरी और पानी की तेज धार में बहते हुए छह किलोमीटर दूर स्वर्णरेखा नदी में पहुंच गयी. इस घटना के बाद नाला रोड में प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे. खुले नालों को स्लैब से ढंकने की प्रक्रिया शुरू की गयी, लेकिन अब एक बार फिर से बारिश से पहले यहां जगह-जगह स्लैब को उखाड़ कर नालियों की सफाई की गयी. फिर उसे खुला ही छोड़ दिया गया. सोमवार को हुई बारिश में तो नजारा ऐसा था कि यहां सड़क व नाली का भेद करना मुश्किल हो गया था.

लोअर वर्द्धवान कंपाउंड : एक साल पहले ही लोअर वर्द्धवान कंपाउंड के एक नाले में अनिल नामक बच्चा बह गया था. इस दौरान उसकी मां व अन्य लोगों ने जान पर खेल कर बहते हुए बच्चे को बाहर निकाला था. घटना के एक साल से ऊपर होने के बाद भी नाला की स्थिति जस की तस है. बच्चे इस नाले तक न पहुंचें, इसके लिए यहां गार्डवाल बनाने की बात कही गयी थी, लेकिन अब तक यहां गार्डवाल नहीं बना है. घनी आबादी होने के कारण बच्चे नाले के किनारे ही खेलते रहते हैं.

लोहराकोचा : प्लाजा सिनेमा हॉल के पीछे का नाला भी खुला हुआ है. बगल में ही पीसीसी रोड है. जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग आवागमन करते हैं. लेकिन जब भी झमाझम बारिश होती है. यहां भी नाला व सड़क एक समान हो जाता है. यहां नाला की चौड़ाई इतनी है कि अगर कोई बड़ा व्यक्ति इसमें गिर जाये तो उसे भी पानी की तेज धार से निकलना काफी कठिन है.

अलबर्ट कंपाउंड नाला : पुरुलिया रोड में अलबर्ट कंपाउंड से होकर बड़ा नाला गुजरता है. बरसात के दिनों में तो यह नाला छोटी नदी का रूप धारण कर लेती है. इस नाले के किनारे भी गार्डवाल नहीं बनाया गया है. एेसे में बरसात के दिनाें में किसी के भी इस नाले में गिरने की आशंका बनी रहती है. इससे जान भी जा सकती है. हर साल नाली निर्माण में 140 करोड़ गंवाता है नगर निगमराजधानी में होनेवाले जलजमाव को रोकने के लिए रांची नगर निगम और पथ निर्माण विभाग द्वारा हर वर्ष करीब 140 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किये जाते हैं.

बिना किसी योजना के नालियों का निर्माण कर पूरी राशि हर साल गंवा दी जाती है. नालियों के निकास की योजना पर समुचित कार्य नहीं होने की वजह से हल्की बारिश में ही शहर तालाब में तब्दील हो जाता है. बेतरतीब ढंग व बिना योजना के बनी नालियों की उपयोगिता शून्य हो गयी है. इन नालियों में बरसात का पानी जाने की जगह ही नहीं है. वहीं, गंदे पानी की निकासी का रास्ता नहीं होने और सफाई नहीं होने की वजह से ज्यादातर नालियां सालों भर जाम रहती हैं.

लाइन टैंक रोड के समीप, थड़पखना चौक के समीप, हरिहर सिंह रोड के मुहाने पर, चेशायर होम रोड के टर्निंग प्वाइंट, मेन रोड में सुजाता चौक के समीप व चुटिया क्षेत्र के नालियों में बारिश का पानी जाता तो है, लेकिन बहाव का रास्ता नहीं होने की वजह से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है. जलजमाव की वजह से शहर की सड़कें जर्जर होती जा रही हैं. सड़कों के गड्ढे बड़े होते जा रहे हैं, पर मरम्मत की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है. शेड्यूल ऑफ रेट फाइनल नहीं होने के कारण पथ निर्माण विभाग सड़कों की मरम्मत कराने की स्थिति में नहीं है.

जलजमाव के कारण टूट रही हैं सड़कें- बरियातू रोड पूरी तरह से टूटी हुई- कटहल मोड़ से अरगोड़ा चौक- खेलगांव पुलिस चौकी से खेल गांव मुख्य गेट तक कहीं-कहीं पर गड‍्ढे- होटवार जेल से खटंगा जानेवाली सड़क पूरी तरह जर्जर- लॉरेटो काॅन्वेंट स्कूल के सामने सड़क पर गड‍्ढे हैं- अल्बर्ट एक्का चौक से चडरी होते हुए सर्कुलर रोड जानेवाली सड़क जर्जर- हेहल में काजू बगान रोड पर गड‍्ढे ही गड‍्ढे हैं- बूटी मोड़ से विकास जानेवाली सड़क में कई जगह गड‍्ढे हैं- हरमू रोड मुख्यमार्ग पर रातू रोड चौराहा से आगे बढ़ते ही सड़क जर्जर है- गाड़ीखाना चौक के पास भुइयांटोली की सड़क पूरी तरह जर्जर है

सफाई के बाद नालों पर नहीं लगता ढक्कन : नगर निगम की लापरवाही के चलते वार्ड नंबर-6 में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. कर्मचारियों की ओर से सफाई के बाद कई जगह नालों पर स्लैब को ढंका नहीं गया है. वार्ड-6 के गली नंबर पांच के मोड़ पर नालों की सफाई के लिए स्लैब हटाया गया, लेकिन उसे ढंका नहीं गया. पिछले साल बारिश के मौसम में कई गाड़ियां यहां हादसे की शिकार हुईं. साथ ही एक गाय और बछड़ा भी नाले में बह गया था. स्थानीय लोग कई बार पार्षद से गुहार लगा चुके हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है.

कोटनाले की सफाई या गंदगी निकालने के बाद सफाई कर्मचारी ही स्लैब नहीं लगाते और आम नागरिक भी नाले पर स्लैब नहीं होने के कारण उसी में गंदगी डाल देते हैं. इससे जलभराव की स्थिति बन जाती है. इससे बारिश के दिनों में परेशानी होती है.- मंटू कुमारहादसों का सबब बन रहे नाले की ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है. कई स्थानों पर बने नाले बगैर स्लैब के हैं, इससे हमेशा हादसा होने का भय बना रहता है. पुल को बना कर आधा-अधूरा छोड़ दिया है, इससे दोनों ओर गहरे गड‍्ढे में गिरने का डर रहता है.- मुन्नी देवी

Prabhat Khabar News Desk
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