विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी पीएचडी की नयी गाइडलाइन में कई प्रावधान किये गये हैं. इससे संबंधित गजट का प्रकाशन कर दिया गया है. इसके तहत पीएचडी कार्यक्रम की अवधि कम से कम तीन वर्ष की होगी. इसमें कोर्स वर्क भी शामिल होंगे. पीएचडी में प्रवेश की तिथि से अधिकतम छह वर्ष का समय दिया जायेगा. वहीं, पुन: रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा.
बशर्ते कि पीएचडी कार्यक्रम पूरा करने की कुल अवधि पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश की तिथि से आठ वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. महिला पीएचडी शोधार्थियों व दिव्यांग को दो वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है. हालांकि, पीएचडी पूरा करने की कुल अवधि ऐसे मामले में पीएचडी में प्रवेश की तारीख से 10 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.
नयी गाइडलाइन के मुताबिक, महिला पीएचडी शोधार्थियों को पीएचडी कार्यक्रम की पूरी अवधि में 240 दिनों तक के लिए मातृत्व अवकाश/शिशु देखभाल अवकाश प्रदान किया जा सकता है. पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट, यूजीसी सीएसआइआर नेट, गेट, सीइइडी और इसी तरह के राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्तीर्ण/छात्रवृत्ति के लिए अर्हता प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जा सकती है.
इसके अलावा संस्थान द्वारा प्रवेश परीक्षा के माध्यम से कार्यक्रम में प्रवेश दिया जा सकता है. एससी/एसटी/इडब्ल्यूएस/दिव्यांग/पिछड़ा वर्ग को प्रवेश परीक्षा में पांच प्रतिशत अंक की छूट मिलेगी. संस्थान द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के लिए 70 प्रतिशत लिखित और 30 प्रतिशत अंक साक्षात्कार/मौखिक परीक्षा के लिए निर्धारित होंगे. स्थायी रूप से नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर (पीएचडी धारी) ही गाइड बन सकेंगे.
साथ ही जिनका कम से कम पांच शोध प्रकाशित हुआ हो. पीएचडी गाइड अपने ही संस्थान/विवि में बन सकेंगे. दूसरे संस्थान/विवि में सह पर्यवेक्षक बन सकते हैं. किसी एक समय में एक प्रोफेसर आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार पीएचडी छात्रों का मार्गदर्शन कर सकते हैं. विवाह या अन्यत्र कहीं चले जाने पर पीएचडी महिला शोधार्थी के शोध आंकड़ों को ऐसे संस्थान में ट्रांसफर करने की अनुमति होगी, जहां शोधार्थी पुन: शोध करना चाहें.
इसमें सभी शर्तों का पालन करना होगा. ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्त उम्र सीमा तीन वर्ष से कम बची है, उन्हें अपने पर्यवेक्षण में नये शोधार्थियों को लेने की अनुमति नहीं होगी. पहले से रजिस्टर्ड शोधार्थी का मार्गदर्शन जारी रहेगा. अब सभी शोध पत्र को इनफ्ल्बिनेट के पास देना होगा.