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कौन है दिनेश गोप? जानें झारखंड में कैसा रहा है उसका आपराधिक इतिहास

दिनेश गोप झारखंड में आतंक का पर्याय बन चुका था. पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के सरगना के रूप में कुख्यात दिनेश गोपाल पर करीब 150 मुकदमे दर्ज हैं. इसने दो दशक से पुलिस की नाक में दम कर रखा था.

झारखंड के एक दुर्दांत नक्सली को पड़ोसी देश नेपाल से गिरफ्तार कर लिया गया है. इसने दो दशक से पुलिस की नाक में दम कर रखा था. सूबे के अलग-अलग जिलों में आपराधिक और नक्सली गतिविधियों को अंजाम देता था. पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को इसको गिरफ्तार करने में कई साल लग गये. आखिरकार पुलिस और एनआईए के संयुक्त प्रयास से नेपाल में पकड़ा गया. इस शख्स का नाम दिनेश गोप है. आखिर कौन है दिनेश गोप, जिसकी गिरफ्तारी से पुलिस ने राहत की सांस ली है.

दिनेश गोप पर दर्ज हैं 150 मुकदमे

दिनेश गोप झारखंड में आतंक का पर्याय था. पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के सरगना के रूप में कुख्यात दिनेश गोप पर प्रदेश में करीब 150 मुकदमे दर्ज हैं. लेवी वसूली के अलावा उस पर टेरर फंडिंग के भी आरोप हैं. उसकी दो पत्नियां हैं, जिन्हें पुलिस ने करीब ढाई साल पहले वर्ष 2020 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इन दोनों पर टेरर फंडिंग में दिनेश गोप की मदद करने के साथ-साथ लेवी वसूली के आरोप साबित हो चुके हैं.

खूंटी के लापा मोरहाटोली का रहने वाला है दिनेश गोप

झारखंड की राजधानी रांची से सटे खूंटी जिला के कर्रा प्रखंड के जरियागढ़ थाना क्षेत्र में स्थित एक गांव है लापा मोरहाटोली. दिनेश गोप मूल रूप से इसी गांव का रहने वाला है. ठेकेदारों में आतंक मचाने और उनसे वसूली के लिए उसके दस्ते के सदस्य कंस्ट्रक्शन साइट्स पर हमले करते थे. निर्माण कार्य में लगी जेसीबी व अन्य मशीनों को फूंक दिया करते थे. साइट पर काम करने वाले मुंशी और कर्मचारियों के साथ मारपीट भी करते थे. परचा छोड़कर लेवी नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी देते थे.

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पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप पर टेरर फंडिंग के भी हैं आरोप

चूंकि दिनेश गोप पर टेरर फंडिंग के भी आरोप थे, उसकी तलाश एनआईए को भी थी. आखिरकार एनआईए की स्पेशल टीम ने उसे नेपाल से गिरफ्तार कर लिया. उसे नेपाल से राजधानी दिल्ली लाया जायेगा. दिल्ली से उसे रांची लाया जायेगा, जहां कोर्ट में पेश किया जायेगा. दिनेश गोप की गिरफ्तारी से झारखंड पुलिस ने राहत की सांस ली है. हाल ही में दिनेश गोप के करीबी सुखराम गुड़िया को झारखंड पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

काली कमाई के निवेश में लेता था पत्नियों की मदद

ठेकेदारों और व्यापारियों को धमकी देकर रंगदारी और लेवी वसूलने वाला दिनेश गोप अपनी 2 पत्नियों हीरा देवी और शकुंतला कुमारी के अलावा कुछ करीबी व्यापारियों के जरिये इन पैसों को कंपनियों में लगाता था. वह जितनी भी काली कमाई करता था, शेल कंपनियों के जरिये उसे बाजार में खपा देता था. इसमें उसकी दोनों पत्नियां और कई रिश्तेदार भी मदद करते थे.

बेड़ो से पुलिस ने जब्त किये 25.38 लाख रुपये

राजधानी रांची से सटे बेड़ो प्रखंड में 10 नवंबर 2016 को पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप के 25.38 लाख रुपये जब्त हुए थे. दिनेश गोप के सहयोगियों के 42.79 लाख रुपये नकद और करीब 70 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति एनआईए ने जब्त कर ली थी. एनआईए की जांच में पता चला था कि दिनेश गोप ने पत्नियों और परिवार के अन्य सदस्यों के जरिये दो दर्जन से अधिक बैंकों में 2.5 करोड़ रुपये जमा कर रखे हैं.

नोटबंदी के बाद पेट्रोल पंप संचालक समेत 4 गिरफ्तार

बता दें कि नोटबंदी के ठीक बाद 10 नवंबर 2016 को रांची पुलिस ने एक पेट्रोल पंप संचालक समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया था. एनआईए ने 19 जनवरी 2018 को इस केस को टेकओवर किया. एनआईए ने दिनेश गोप के सहयोगी सुमंत कुमार और अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की, तो उसे 90 लाख रुपये कैश और निवेश संबंधी कई कागजात मिले. इसके बाद ही एनआईए ने उसकी दोनों पत्नियों को गिरफ्तार किया. मार्च 2020 में दिनेश गोप के खास सहयोगी जयप्रकाश सिंह भुइयां और अमित देशवाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पीएलएफआई के पैसे को कंपनियों में निवेश करने वाले गुजरात के एक व्यापारी की भी इस मामले में गिरफ्तारी हुई थी.

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दिनेश गोप का लंबा है आपराधिक इतिहास

पीएलएफआई सुप्रीमो और झारखंड पुलिस के मोस्ट वांटेड नक्सली दिनेश गोप का लंबा आपराधिक इतिहास है. उस पर दर्जनों हत्या के आरोप हैं. कहते हैं कि आधा दर्जन से अधिक बार इस खूंखार नक्सली को पुलिस एवं सुरक्षा बलों ने घेरा. दिनेश गोप के दस्ते के साथ जब भी सुरक्षा बलों की मुठभेड़ हुई, पीएलएफआई सुप्रीमो जवानों को चकमा देकर भाग निकला. झारखंड पुलिस के अलावा बिहार पुलिस भी उसकी तलाश कर रही थी.

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Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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