मीठे जहर की गिरफ्त में युवा

– अमित सिंह – नशे के नये चलन से प्रशासन अनभिज्ञ क्विक फिक्स, डेंडराइट, सुलेशन और कॉफ सिरप का हो रहा धल्ले से इस्तेमाल गुमराह हो रहे युवा समाज में हो रही इसकी जडें मजबूत साहिबगंज : जिले भर में मीठे जहर की प्रचलन युवा वर्ग को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 30, 2014 2:19 AM
– अमित सिंह –
नशे के नये चलन से प्रशासन अनभिज्ञ
क्विक फिक्स, डेंडराइट, सुलेशन और कॉफ सिरप का हो रहा धल्ले से इस्तेमाल
गुमराह हो रहे युवा
समाज में हो रही इसकी जडें मजबूत
साहिबगंज : जिले भर में मीठे जहर की प्रचलन युवा वर्ग को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है. जिससे समाज में मानसिक विकृति वालों की संख्या में इजाफा होने का डर पैदा हो गया है. यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका तो इसके विपरीत परिणाम सामने आ सकते हैं. कल तक जहां नशा के रूप में गांजा, सिगरेट व भांग अपनी पैठ जमा चुका था, आज उसके स्थान पर ऐसे जहर ने ले लिया है जो रंग और बदबू से परे है. जी हां, हम बात कर रहे हैं कि क्विक फिक्स, डेंडराइट, सुलेशन जैसे चिपकाने वाले पदार्थो की. इन चीजों का इस्तेमाल किसी भी प्लास्टिक, चमड़ा, ट्यूब आदि को चिपकाने में किया जाता है. लेकिन अफसोस की बात यह है कि निष्क्रिय सामानों के लिए प्रयोग होने वाले इन पदार्थों को आज शौक से नौनिहाल व युवा नशा के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
अक्सर शहर की गलियों या फिर मैदानों में दोपहर के वक्त जब आम लोगों का आवागमन कम हो जाता है तो उसे रूमाल में डाल कर युवा और बच्चे सूंघते देखने को मिल जायेंगे. बड़े-बड़े महानगरों में नशा के तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले कॉफ सीरप आदि का इस्तेमाल अब साहिबगंज जैसे छोटे शहरों में भी नशे के रूप में हो रहा है. इसके अलावा आयोडेक्स दर्द निवारक मलहम को ब्रेड में जेली की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. इसे आज के युवा एवं युवती मेडिकल दुकानों से खरीद कर बिना पानी मिलाये ही एक सांस में पी जाते हैं, जिसके बाद नशे का सुरूर चढ.ने लगता है.