2004 में शशधर को मिला था संगीत नायक पुरस्कार

सरायकेला : 60 साल के शशधर आचार्य का चयन इस वर्ष के पद्मश्री पुरस्कार के लिए किया गया है. गुरु शशधर आचार्य को 2004 में संगीत नायक पुरस्कार मिला था. श्री आचार्य 1990 से 1992 तक सरायकेला स्थित राजकीय छऊ डांस सेंटर के निर्देशक भी रह चुके हैं. वर्तमान में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 26, 2020 2:18 AM

सरायकेला : 60 साल के शशधर आचार्य का चयन इस वर्ष के पद्मश्री पुरस्कार के लिए किया गया है. गुरु शशधर आचार्य को 2004 में संगीत नायक पुरस्कार मिला था. श्री आचार्य 1990 से 1992 तक सरायकेला स्थित राजकीय छऊ डांस सेंटर के निर्देशक भी रह चुके हैं. वर्तमान में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में विजिटिंग प्रोफेसर हैं.

गुरु शशधर आचार्य सरायकेला छऊ का विदेशों में प्रदर्शन कर चुके हैं. शशधर आचार्य को पद्मश्री पुरस्कार मिलने की खबर से सरायकेला में जश्न का माहौल है. शशधर आचार्य सरायकेला आये हुए हैं. बड़ी संख्या में लोग उन्हें बधाई देने के लिए उनके घर पर पहुंच रहे हैं.
अपने पिता से पढ़ा छऊ का पहला पाठ : शशधर आचार्य का छऊ नृत्य से बचपन से ही लगाव रहा है. विरासत में मिली इस कला को उन्होंने पांच साल की उम्र से से ही सीखना शुरू किया. गुरु शशधर के पिता गुरु लिंगराज आचार्य भी छऊ गुरु थे. इसके अलावा उन्होंने पद्मश्री सुधेंद्र नारायण सिंहदेव, पद्मश्री केदार नाथ साहू, गुरु विक्रम कुंभकार व गुरु बन बिहारी पटनायक से भी छऊ की शिक्षा हासिल की.
छऊ के लिए समर्पित है आचार्य परिवार : छऊ गुरु शशधर आचार्य का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी छऊ नृत्य के लिए समर्पित है. पिछले पांच पीढ़ियों से उनका परिवार बच्चों को छऊ नृत्य सिखाने का कार्य कर रहा है. उनके बच्चे भी छऊ नृत्य सीख रहे हैं.
दिल्ली में भी सिखाते हैं छऊ : शशधर आचार्य सरायकेला के इंद्रटांडी आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा की स्थापना कर बच्चों को छऊ नृत्य सिखाते हैं. वर्तमान में नयी दिल्ली में आचार्य छऊ नृत्य विचित्रा की संस्था की एक शाखा संचालित कर रहे हैं, जिसमें कलाकारों को सरायकेला छऊ की शिक्षा दे रहे हैं.