पेशा कानून व सीएनटी एक्ट पर कार्यशाला का आयोजन
संवाददाता,खरसावां कुचाई के दलभंगा में बकास्त मुंडारी खुंटकट्टी रक्षा एंव विकास समिति (39 मौजा) के तत्वावधान में पेशा कानून, सीएनटी एक्ट, वनाधिकार कानून, ग्राम सभा के सशक्तिकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया. रांची से आये झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष कनक सिंह मुंडा ने कहा कि सीएनटी एक्ट आदिवासियों की सुरक्षा कवच […]
संवाददाता,खरसावां कुचाई के दलभंगा में बकास्त मुंडारी खुंटकट्टी रक्षा एंव विकास समिति (39 मौजा) के तत्वावधान में पेशा कानून, सीएनटी एक्ट, वनाधिकार कानून, ग्राम सभा के सशक्तिकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया. रांची से आये झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष कनक सिंह मुंडा ने कहा कि सीएनटी एक्ट आदिवासियों की सुरक्षा कवच है. इस कानून में संशोधन करने की आवश्यकता नहीं है. झाजबआ के संयोजक जेविय कुजूर ने मुख्य रुप से पेशा कानून, वन अधिनियम कानून की विस्तार पूर्वक जानकारी दी तथा इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की. उन्होंने विस्थापन की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की. तमाड़ से आये राधाकृष्ण मुंडा ने ग्राम सभा को सशक्त बनाने पर बल दिया. गांव को मजबूत किये बगैर विकास नहीं हो सकता है. सुरेश चंद्र सोय ने कहा कि झारखंड में आदिवासी मूलवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और आदिवासियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है. उन्होंने कहा कि जब तक कॉरपोरेट घरानों के हित में कानून बनता रहेगा, तब तक आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरा बना रहेगा. झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के कोल्हान प्रभारी सोहन लाल कुम्हार ने कहा कि सीएनटी एक्ट 1908 में बना है, परंतु कई क्षेत्रों में इसका उल्लंघ्न हो रहा है. कार्यशाला को समिति के सचिव धर्मेंद्र सिंह मुंडा, उपाध्यक्ष नोयेल नाग, जिला परिषद सदस्या एमलेन नाग, मुखिया लखीराम मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, करम सिंह मुंडा, मानसिंह मुंडा, सोहन लाल कुम्हार, भुवनेश्वर सिंह मुंडा, पदुमोहन मुंडा, सहदेव सिंह मुंडा समेत कई लोगों ने संबोधित किया.
