खरसावां : झारखंड आंदोलनकारी मंच के मुख्य संयोजक धनपति सरदार ने कहा कि खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए लोगों के परिजनों की तलाश का कार्य पहले से ही शुरू हो जाना चाहिए था.
वर्तमान व पूर्व की सरकारों ने इस पर काफी विलंब किया. उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड को हुए 67 साल गुजर गये, परंतु अब तक शहीद हुए लोगों की वास्तविक संख्या का भी पता नहीं हो सका है. सरकार को इस पर गंभीरता दिखानी होगी. उन्होंने सरकार से खरसावां गोलीकांड के वास्तविक दस्तावेज को सार्वजनिक करने की मांग की है.
श्री सरदार ने कहा कि प्रशासन ने शहीदों के जिन चार-पांच परिवारों को चिह्नित किया है, उन्हें सम्मानित करें. शेष बचे शहीदों के परिवार की तलाश के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन करें, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, शहीद समिति के प्रतिनिधि, क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता, झारखंड आंदोलनकारी, मीडिया के प्रतिनिधि व खरसावां गोली कांड के समय के आंदोलनकारियों को रखा जाये. श्री सरदार ने कहा कि खरसावां गोलीकांड में सरायकेला प्रखंड के दो आंदोलनकारी भुरकुली गांव के दशरथ मांझी व हेसा गांव के मांगु सोय भी घायल हुए थे. दशरथ मांझी और मांगु सोय आज भी गुमनामी की जिंदगी जी रहे है.
उन्हें भी सरकार की ओर से सम्मानित किया जाना चाहिए. उन्होंने झारखंड आंदोलनकारियोंं को भी सम्मानित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सिर्फ खाना पूर्ति करने भर से काम नहीं चलने वाला है. मौके पर राजेश मुंडरी भी मौजूद थे.
