शहर के बाहर फेंके जा रहे जैव कचरे से 10 हजार की आबादी पर खतरा

चाईबासा :जिले के मरीजों की सेहत सुधारने वाले सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट से भरे लाल, पीले व नीले प्लॉस्टिक बैगों को ऐसे ही शहर के किनारे स्थित श्मशान काली में ले जाकर डंप किये जाने से उसके आसपास के इलाकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. ज्ञात […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 12, 2019 5:05 AM

चाईबासा :जिले के मरीजों की सेहत सुधारने वाले सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट से भरे लाल, पीले व नीले प्लॉस्टिक बैगों को ऐसे ही शहर के किनारे स्थित श्मशान काली में ले जाकर डंप किये जाने से उसके आसपास के इलाकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. ज्ञात हो कि अस्पताल से निकलने वाले विभिन्न बीमारियों का संक्रमित जैव कचरे को अस्पताल प्रबंधन परिसर में रखे कूड़ेदानों में डंप करा रहा है रहा है.

वहीं नप के साथ समझौते के आधार पर पीपीपी मोड में शहर से कचरे का उठाव कर रही निजी एजेंसी (पायनियर एमएसडब्ल्यूएम, चाईबासा) अस्पताल के उक्त संक्रमित बायोमेडिकल कचरे से भरे बैगों को शहर के एक छोर पर बसे शमशान काली में ले जाकर सीधे डंप करा रही है. इससे शमशान काली के आसपास के टोंटो, महादेव कॉलोनी, डिलियामार्चा, सुफलसाई, फ्लोर मिल, मेरी टोला में बसी 10000 से अधिक की आबादी जानलेवा बीमारियों के संक्रमण की चपेट में आ रही है.
पहले फेंकने से पूर्व जलाते थे मेडिकल वेस्ट
पूर्व सीएस हिंमांशु भूषण बरवार के काल में सदर अस्पताल से निकले बायो मेडिकल कचरे को निस्तारण से पूर्व पोस्टमॉर्टम हाउस के समीप खुले में जलाया जाता था. बाद में वर्तमान सीएस डॉ मंजु दुबे ने इसकी जानकारी होने के पश्चात मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए परिसर में पिट बानाने के साथ ही बायो हेजार्ड कमरा बनाने का निर्देश दिया गया.
परिसर में पीले, लाल, नीले व सफेद रंग के दरवाजे लगे चार कमरे बनकर तैयार हैं, लेकिन अस्पताल में सफाई की कमान संभाले लोग बायो मेडिकल कचरे को बायो हेजार्ड व पिट में डंप करने की बजाय सीधे कूड़ेदान में फेंकवा रहे हैं, जिसे नप के अंतर्गत कार्यरत निजी एजेंसी के सफाई कर्मी जानकारी के अभाव में कूड़ेदान से उठाकर सीधे शमशान काली के पीछे फेंक दे रहे है. इससे उक्त क्षेत्र के लोगों पर तो खतरा मंडरा ही रहा है, साथ ही कचरे का उठाव करने वाले सफाई कर्मियों में भी जानलेवा बीमारियों के संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है.
दवा डिस्पोजल के दौरान शीशी फंसने से इन्सिनरेटर हुआ खराब
पहले सदर अस्पताल स्थित मुर्दा घर (मॉर्च्युअरी) के समीप बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए प्रशासन द्वारा पूर्व में इन्सिनरेटर लगाया गया था, जो कि कई वर्षों से खराब है. दरअसल, पूर्व सीएस डॉ गौड़ के काल में आवश्यकता से अधिक दवाइयों की खरीद के मामले की जांच के दौरान सभी दवाइयों को इन्सिनरेटर में डाल डिस्पोज किया गया था.
उस दौरान इन्सिनरेटर में अधिक मात्रा में दवाइयों की शीशियां फंस जाने के कारण उक्त मशीन खराब हो गयी थी. बाद में हालांकि रांची से इंजीनियर ने उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकन मशीन में अत्यधिक संख्या में शीशियां चली जाने के कारण उसने जवाब दे दिया. तब से इन्सिनरेटर खराब पड़ा है. उसके बाद से अबतक अस्पताल के बायोमेडिकल वेस्ट का जैसे-तैसे निस्तारण किया जा रहा है.
सजा का है प्रावधान
मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही या कोताही पाये जाने पर अस्पताल प्रबंधन या संबंधित व्यक्ति के खिलाफ केस होने पर बड़ी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है. एन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट-1986 के अनुसार इसके दोषियों को पांच साल तक की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना जैसी कड़ी सजा हो सकती है.

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